Yoga | योग: जीवन बदल जायेगा: A Life-Changing Guide

आज के समय मे अपने तन और मन को स्वस्थ एवं प्रसन्न तथा इस भागती दौड़ती जिंदगी मे तनाव को कम करने का सबसे अच्छा साधन Yoga है। योग एक ऐसी आध्यात्मिक प्रक्रिया है जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ मिलाने का काम होता है।

योग का इतिहास करीब 5000 साल पुराना माना जाता है। धार्मिक ग्रंथो पुराणो एवं वैदिक साहित्य मे भी योग का उल्लेख मिलता है।प्राचीन काल के मूर्तिकला एवं स्थापत्य कला मे भी योग करते हुए मूर्तियो को देखा जा सकता है। भारतीय दर्शन में, षड् दर्शनों में से एक का नाम योग है। पतंजलि का योग सूत्र इस बात का प्रमाण है कि भारत मे योग बहुत ही प्राचीन समय से विधमान है।विभिन्न योगियो ने योग को विभिन्न तरह के नाम दिए जैसे पतंजलि का अष्टांग योग (यम ,नियम,आसन,प्राणायाम ,प्रत्यहार ,धारणा,ध्यान ,समाधि)। भगवद् गीता का त्रि-स्तरीय योग ( भक्ति योग,कर्म योग ,ज्ञान योग)। और 15वी सदी का हठयोग जो सत्कर्म पर केन्द्रित है, भौतिक शरीर की शुद्धि ही मन की, प्राण की और विशिष्ट ऊर्जा की शुद्धि लाती है।

भारत मे योग का इतिहास बहुत ही प्राचीन है।

योग क्या है | What is Yoga?

योग एक विज्ञान  है जो शरीर, मन, आत्मा और ब्रह्मांड को एकजुट बनाता है। इसे प्राचीन भारतीय दर्शन में मन और शरीर के अभ्यास के रूप में जाना जाता है। योग की विभिन्न शैलियाँ और शारीरिक मुद्राएँ, एंव तकनीक से व्यक्ति तनाव मुक्त और प्रसन्नचित्त रहता है।

योग संस्कृत भाषा के ‘युज धातु’ से बना है जिसका अर्थ होता है आत्मा का परमात्मा से मिलन । योग  मुख्य रूप से एक आध्यात्मिक अनुशासन है, जिसमे जीवन शैली को पूर्ण रूप से आत्मसात किया जाता है।

योग एक कला भी है। योग केवल मान्यताओं की ही प्रणाली नहीं है अपितु यह शरीर और मन के एक दूसरे पर प्रभाव को ध्यान में रखता है, और उन्हें आपसी सद्भाव (mutual harmony) में लाता है।

types of yoga
Types of Yoga

योग का उद्देश्य क्या है | Principle of Yoga

योग का उद्देश्य स्वास्थ्य में सुधार से लेकर मोक्ष प्राप्त करने तक है। धार्मिक उद्देश्य की बात करे तो योग का लक्ष्य मोक्ष का रूप लेता है, जो सभी सांसारिक कष्ट एवं जन्म और मृत्यु के चक्र (संसार) से मुक्ति प्राप्त करना है।

डाॅ सर्वपल्ली राधाकृष्णन लिखते हैं कि योग में निम्नलिखित तत्व शामिल हैं: वितर्क, विचार, आनंद और अस्मिता।

योग के प्रकार | Types of Yoga

  1. अष्टांग योग: यह योग मुख्य रूप से आठ मुद्राओं का समन्वय है जो तेजी से सांस लेने की प्रक्रिया को जोड़ता है।
  2. हठ योग: यह योग शारीरिक मुद्राएं सिखाता है। “हठ योग” की कक्षाएं आमतौर पर स्कूलो मे होती है।
  3. जीवामुक्ति योग: इस योग मे आध्यात्मिक शिक्षाओं और प्रथाओं को शामिल किया गया। योग का यह प्रकार स्वयं के पोज़ पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय पोज़ के बीच रफ़्तार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करता है।
  4. कुंडलिनी योग: कुंडलिनी का अर्थ है “एक साँप की तरह कुंडलित होना।” कुंडलिनी योग ध्यान की एक प्रणाली है जिसका उद्देश्य मन में दबी हुई ऊर्जा को जारी करना है।
  5. यिन: यह एक शांति प्रदान करने वाला और ध्यान करने वाला योग अभ्यास है इस योग के द्वारा जोड़ो का दर्द कम किया जा सकता है।
  6. अयंगर योग: योग के इस प्रकार में विभिन्न प्रॉप्स (सहारा) जैसे कम्बल, तकिया, कुर्सी और गोल लम्बे तकिये इत्यादि का प्रयोग करके सभी पोज का सही संरेखण किया जाता है।

इस के अतिरिक्त और भी कई प्रकार के योग है जैसे कृपालु योग, आराम योग, विनियोग इत्यादि।

योग के लाभ (फायदे) | Benefits of Yoga

योग के कई लाभ व फायदे है

  • रक्त प्रवाह को बढ़ाता है
  • शरीर के लचीलेपन में सुधार करता है
  • उपास्थि और जोड़ों को टूटने से बचाता है और रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है।
  • ध्यान केंद्रित करने की शक्ति को मजबूत कर ने मे मदद करता है।
  • पाचन समस्याओं को रोकने मे मदद करता है।
  • जीवन मे संतुलन को बेहतर बनाता है।
  • आत्म-सम्मान को बढ़ाता है।
  • एक स्वस्थ जीवन शैली प्रदान करता है।

योग की सीमाऐ ( नुकसान)

योग को कुछ परिस्थिती मे करने से बचना चाहिए अथवा किसी निरीक्षक के अंतर्गत करना चाहिए।

  • यदि योग हाल ही में सीखना प्रारम्भ किया है तो चरम स्थिति और कठिन तकनीकों से बचना चाहिए, जैसे कि हेडस्टैंड, पद्मासन और बलपूर्वक साँस लेना।
  • यदि गर्भवती महिला है अथवा किसी प्रकार की मेडिकल समस्या है जैसे हाई ब्लड प्रेशर, ग्लूकोमा या कांच बिंदु रोग और साइटिका इत्यादि से पीड़ित हैं तो, योग का अभ्यास करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

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