वसंत पंचमी: सरस्वती पूजा | Vasant Panchmi: Saraswati Pooja

सरस्वती पूजा हिन्दुओ का प्रसिद्ध त्योहार है। माँ सरस्वती हिन्दु धर्म के अनुसार विधा की देवी मानी जाती है। माघ शुक्ल के पंचमी को Vasant Panchmi अथार्त सरस्वती पूजा मनाई जाती है।

वसंत पंचमी क्यो मनाई जाती है?

हिन्दु धर्म ग्रंथ के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि का सृजन किया लेकिन वे अपनी रचना से संतुष्ट से नही थे। फिर उन्होंने पृथ्वी पर अपने कमंडल से जल को छिड़कते है। जल के छिड़कते ही पृथ्वी पर कंपन होनी लगती है। और वृक्षो मे से एक अद्भुत सुंदर शक्ति प्रकट होती है जिसके एक हाथ मे वीणा और दूसरा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। भगवान ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा बजाया संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी, तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। चूँकि सरस्वती देवी के आगमन से संसार मे ज्ञान, कला और संगीत की स्थापना हुई इसलिए  माँ सरस्वती की पूजा की जाती है।माँ सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप मे वसंत पंचमी मनाई जाती है।

वसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) कैसे मनाए? | How to Celebrate Vasant Panchmi

सरस्वती पूजा वाले दिन न सिर्फ विधार्थी वरन कला और संगीत से जुड़े व्यक्ति भी पूजा करते है। इस दिन लोग पीले रंग के वस्त्र धारण कर माँ सरस्वती की आराधना करते है

और प्रसाद वितरण करते है।कही कही पंडाल भी बना कर माँ सरस्वती की मूर्ति बैठाते है और तीन दिन के बाद प्रतिमा विसर्जित कर देते है।

सरस्वती पूजा करने की विधि:

  • माघ शुक्ल के पंचमी को वेदी बना कर चावल से अष्ट दल बनाना चाहिए।
  • सबसे आगे भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए।
  • कलश मे गेंहु और जौ की बाली को डाल कर कलश स्थापित करना चाहिए।
  • कलश स्थापन के बाद भगवान गणेश, शिव, विष्णु और भगवान सूर्य की पूजा के बाद माँ सरस्वती की आराधना करनी चाहिए।
  • अगर हो सके तो इस दिन (पीत) पीला वस्त्र धारण करना चाहिए।

माँ सरस्वती के नाम:

माँ सरस्वती के कई नाम है। शास्त्रो मे इनके कुल 108 नाम का उल्लेख किया गया है उनमे से 12 नाम जो प्रमुख है। इस  प्रकार है-

1.भारती 2. सरस्वती 3. शारदा 4. हंसवाहिनी 5. जगती 6. वागीश्वरी 7. कुमुदी 8. ब्रह्मचारिणी 9. बुद्धिदात्री 10. वरदायिनी 11. चंद्रकाति 12. भुवनेश्वरी।

वसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) के दिन क्या नही करे।

  • Vasant Panchmi के दिन काले रंग के वस्त्र नही पहनने चाहिए।
  • इस दिन मांस मदिरा का सेवन नही करना चाहिए।
  • इस दिन पेड़ पौधो को नही काटना चाहिए।
  • इस दिन किसी से झगड़ा या मन मे क्लेश नही लाने चाहिए क्योंकि इस दिन ऐसा करने से पितृदोष लगता है।
  • इस दिन सर्वप्रथम उठकर स्नान कर माँ सरस्वती की आराधना करनी चाहिए।

वसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) का महत्व | Importance of Vasant Panchmi

यों तो वसंत का माह ही जीवन मे नया संचार ले आता है लेकिन वसंत पंचमी का  दिन लोगो को बहुत प्रभावित करता है। प्राचीन काल से ही इस दिन माँ शारदे की पूजा कर के लोग अपने क्षेत्र मे अधिक कुशल होने की प्रार्थना करते है। इस दिन सभी क्षेत्र के कलाकार एवं शिक्षाविद् माँ सरस्वती की पूजा बड़े धूमधाम से मनाते है।

सरस्वती पूजा हिन्दुओ का प्रसिद्ध त्योहार है। माँ सरस्वती  हिन्दु धर्म के अनुसार विधा की देवी मानी जाती है। माघ शुक्ल के पंचमी को वसंत पंचमी अथार्त सरस्वती पूजा मनाई जाती है।

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