शनि शिंगणापुर | Shani Shingnapur:  Popular temple of Shani

Shani Shingnapur मंदिर भारत के महाराष्ट्र राज्य के अहमदनगर ज़िले में स्थित है। यह मंदिर  शनि देवता को अर्पित है। प्रत्येक शनिवार को तथा प्रत्येक शनिवार के अमावस को देश के कोने-कोने से दर्शनाभिलाषी यहाँ आते हैं तथा शनि भगवान की पूजा अर्चना तथा अभिषेक इत्यादि करते हैं। इस मंदिर में प्रति दिन प्रातः 4 बजे एवं शाम को 5 बजे यहाँ आरती होती है। शनि जयंती के अवसर पर जगह-जगह से प्रसिद्ध ब्राह्मणों को बुलाकर यहाँ ‘लघुरुद्राभिषेक’ कराया जाता है। यह कार्यक्रम सुबह के 7बजे से शाम के 6 बजे तक चलता है।

शनि शिंगणापुर मंदिर की शिल्पकला | Shani Shingnapur Architecture

Shani Shingnapur Mandirमें भगवान शनि की स्वयंभू मूर्ति हैंं। यह मूर्ति काले रंग की है। यह मूर्ति 5 फुट 9 इंच ऊँची और 1फुट 6 इंच चौड़ी हैं। शनि भगवान की यह मूर्ति संगमरमर के एक चबूतरे पर विराजमान है। यहाँ शनिदेव सभी प्रकार के मौसम और प्रहर चाहे वह धूप हो, आँधी हो, तूफान हो या जाड़ा हो, में बिना छत्र धारण किए खड़े रहते हैं।

शनि शिंगणापुर की कथा | Story of Shani Shingnapur

कथनानुसार एक बार इस गांव में बाढ़ आ गई,बाढ़ का पानी इतना बढ़ गया कि सब डूबने लगा। जब बाढ़ के  पानी का स्तर  कम हुआ तो एक व्यक्ति ने पेड़ की झाड़ पर एक बड़ा सा पत्थर देखा। ऐसा अजीबोगरीब पत्थर उसने आज तक नहीं देखा था, इसलिए लालचवश उसने उस पत्थर को पेड़ से नीचे उतारा और उसे तोड़ने के लिए जैसे ही उसमें कोई नुकीली वस्तु मारी उस पत्थर में से खून बहने लगा। यह देखकर वह डर गया और वहां से भाग गया। गांव वापस लौटकर उस लालची आदमी ने  सब लोगों को यह बात बताया। कौहतलवश सभी लोग दोबारा उस स्थान पर पहुंचे जहां पर वह पत्थर रखा था। सभी उस पत्थर को देख भौचक्के रह गए। उन लोगो की  समझ में नहीं आ रहा था कि  इस चमत्कारी पत्थर का करें तो क्या करें।

अंतत: सभी लोग गांव वापस लौटकर अगले दिन फिर जाने का फैसला किया। उसी रात को गांव के एक शख्स के सपने में भगवान शनि देव आए और बोले “मैं शनि देव हूं, जो पत्थर तुम्हें मिला है उसे अपने गांव में  स्थापित करो”।अगली सुबह होते ही उस शख्स ने गांव वालों को सपने वाली सारी बात बताई। जिसके बाद सभी उस पत्थर को उठाने के लिए गये। लेकिन पत्थर अपनी जगह से एक इंच भी न हिली। बहुत देर तक कोशिश करने के बाद गांव वालो गांव वापस लौट गये।

उस रात को फिर से शनि देव उस व्यक्ति के सपने में आए। और उसे यह बताया  कि  पत्थर कैसे उठाया जा सकता है। शनि देव बोले  “मैं उस स्थान से तभी उठूँगा जब मुझे उठाने वाले लोग सगे मामा-भांजा  होंगे”। तभी से लोगो का कहना है कि इस मंदिर में यदि सगे मामा-भांजा दर्शन करने जाएं तो दर्शन का महत्व बढ़ जाता है। इसके बाद उस सगे मामा भांजे ने मिल कर शिला को उठाकर एक बड़े से मैदान में सूर्य की रोशनी के नीचे स्थापित किया।

शनि शिंगणापुर मंदिर की खासियत

  • शनि शिंगणापुर मंदिर की पहली प्रमुख विशेषता यह है कि भगवान शनि देव की मूर्ति खुले आसमान के नीचे संगमरमर के चबूतरे पर विराजमान हैं।
  • Shani Shingnapur के बारे में कहा जाता है कि यहाँ देवता हैं पर मंदिर नहीं,वृक्ष हैं पर छाया नहीं, घर हैं पर दरवाजा नहीं, भय हैं पर शत्रु नहीं।
  • वैशाख चतुर्दशी के अमावस को शनि जंयती होती है।इस दिन भगवान शनि देव की प्रतिमा नीले रंग की हो जाती हैं।
  • शिंगणापुर में किसी के भी घर मे दरवाजे नही बने हैं।
  • ऐसा कहा जाता है कि कोई भी भक्त जो मंदिर के भीतर जाए वह केवल सामने ही देखता हुआ जाए। यदि कोई उसे पीछे से आवाज लगाए तो मुड़कर देखना नहीं चाहिए। भगवान शनि देव को माथा टेक कर सीधा-सीधा बाहर आ जाना चाहिए, यदि पीछे मुड़कर देखा तो बुरा प्रभाव होता है।

शनि शिंगणापुर की महत्ता | Importance of Shani Shingnapur

हिन्दू धर्म के अनुसार कहते हैं भगवान शनि देव की दृष्टि पड़ती है , तो रंक भी राजा बन जाता है। लेकिन यदि शनि देव क्रोधित हो जाए तो देवता, सिद्ध, मनुष्य,असुर ,नाग कोई भी हो  समूल नष्ट हो जाते हैं। महर्षि पाराशर के अनुसार शनि ग्रह  जिस अवस्था में होगा, उसके कार्यानुरूप फल प्रदान करेगा। जिस प्रकार तेज अग्नि सोने को तपाकर कुंदन बना देती है, उसी प्रकार शनि देव भी विभिन्न परिस्थितियों के ताप में मनुष्य को तपाकर उन्नति के पथ पर आगे बढ़ने की सामर्थ्य एवं लक्ष्य प्राप्ति के लिए साधन उपलब्ध कराते है। धार्मिक पंचांगो के अनुसार नवग्रहों में शनि ग्रह को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि यह किसी भी एक राशि पर सबसे अधिक समय तक विराजमान रहते है। श्री शनि देवता को अत्यंत क्रोधित और जागृत देवता माना जाता है।

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