सावन के महीने का महत्व | Importance of Sawan – Bholenath Month

हिंदी पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह के बाद Sawan माह की शुरुआत होती है और भाद्रपद मास के शुरुआत मे समाप्त होती है।हिंदी पंचांग के श्रावण मास को सावन का महीना भी कहते है। हिंदु धार्मिक ग्रंथो के अनुसार इस मास मे भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस मास के प्रत्येक सोमवार को विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है।

सावन के महीने का महत्व। Importance of Sawan

हिंदू  धार्मिक ग्रंथो के अनुसार यह माह भगवान शिव को समर्पित होता है।इस मास मे प्रत्येक सोमवार को स्त्रियाँ व्रत  रखती है। कोई कोई स्त्री-पुरुष तो 16 सोमवार का भी व्रत करते है। मान्यता है कि इस माह में शिव की पूजा करने  से भक्तों की सभी मुरादें और इचछाऐ पूरी होती हैं। इस माह में सोमवार के व्रत करने से मनोवांछित फल शीघ्र प्राप्त होता है। इस माह में शिव की पूजा से विवाह में आने वाली सभी बाधा एवं दिक्कतें दूर हो जाती हैं। सावन में शिव पूजा से सभी तरह के दुख की समाप्ति होती है। शिव पूजा से समस्त पाप का नाश होता है और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सावन के महीने मे क्या नही करना चाहिए।

Sawan के महीने मे निम्नलिखित कार्य नही कर ने चाहिए।

  • इस मास मे लहसुन-प्‍याज, तेज मसाले वाला और तामसिक भोजन वर्जित माना गया है।
  • सावन महीने में पत्ते वाली सब्जियां एंव साग जैसे पालक, मैथी, लाल भाजी, बथुआ ,फूल गोभी और पत्ता गोभी वाली सब्जियाँ नही खानी चाहिए।
  • Sawan मास मे शराब ,तंबाकू-सिगरेट आदि कोई नशा पदार्थ का भी सेवन नहीं करना चाहिए।यहाँ तक की इस महीने में पान-सुपारी भी नही खानी चाहिए।
  • इस मास मे शहद का सेवन भी वर्जित बताया गया है।

हिंदू धर्म मे श्रावण मास को विशेष रूप से महत्व दिया गया है।इस मास मे देवो के देव महादेव भगवान भोलेशंकर की पूजा अर्चना होती है। इस  मास मे भारत के कई क्षेत्रो मे मेले भी लगते है। इस मास के प्रत्येक सोमवार को स्त्री-पुरुष भगवान शिव की पूजा करते है। इस मास मे रूद्राभिषेक, जलाभिषेक, महामृत्युंजय जप जैसे धार्मिक कार्य और पूजा भी की जाती है।इसी मास मे कावंडी जल लेकर बाबा भोलेनाथ के शिवलिंग पर जल चढ़ाने है।कहा जाता है कि श्रावण मास मे भगवान शिव की आराधना कर ने से मनोवांछित फल की शीघ्र प्राप्ति होती है।

श्रावण (सावन) मास की कथा | Story of Sawan

शिव पुराण के अनुसार, कहा जाता है कि जब देवासुर संग्राम में समुद्र मंथन से  विष  निकला तब भगवान  शिव ने पी लिया था। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला और शरीर बहुत ही ज्यादा गर्म हो गया था जिससे भगवान शिव को कष्ट होने लगा।तब भगवान शिव को इस कष्ट से बचाने  के लिए इंद्रदेव ने जमकर वर्षा की। कहते हैं कि इसी घटनाक्रम के कारण सावन के महीने का आरंभ हुआ था। जिस प्रकार से शिव जी ने विषपान करके सृष्टि की रक्षा की थी। उसी प्रकार से सावन के महीने में शिव जी अपने भक्तों का कष्ट अति शीघ्र दूर कर देते हैं।

हिंदू  धार्मिक ग्रंथो के अनुसार यह माह भगवान शिव को समर्पित होता है।इस मास मे प्रत्येक सोमवार को स्त्रियाँ व्रत  रखती है। कोई कोई स्त्री-पुरुष तो 16 सोमवार का भी व्रत करते है। मान्यता है कि इस माह में शिव की पूजा करने  से भक्तों की सभी मुरादें और इचछाऐ पूरी होती हैं। इस माह में सोमवार के व्रत करने से मनोवांछित फल शीघ्र प्राप्त होता है। इस माह में शिव की पूजा से विवाह में आने वाली सभी बाधा एवं दिक्कतें दूर हो जाती हैं। सावन में शिव पूजा से सभी तरह के दुख की समाप्ति होती है। शिव पूजा से समस्त पाप का नाश होता है और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: सरदार वल्लभ भाई पटेल

सावन माह के सोमवार को पूजा कैसे करे।

सावन के सोमवार मे भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है।इस दिन भगवान शिव की पूजा इस प्रकार से करें।

  • सुबह उठकर स्नान कर साफ सुथरे वस्त्र धारण कर भगवान शिव की पूजा कर ने के लिए तैयार होनी चाहिए।
  • भगवान शिव की पूजा भगवान शिव के किसी भी मंदिर और शिवालय मे की जा सकती है।
  • सर्वप्रथम भगवान शिव के शिवलिंग पर से अन्य लोगो के द्वारा चढ़ाये हुए प्रसाद एवं फलफूल हटाकर शिवलिंग को जल से साफ करे।
  • इस के बाद शिवलिंग पर घृत अथवा घी चढाये।
  • इस के बाद शिवलिंग पर मधु चढ़ाये
  • इस के बाद शिवलिंग पर सिंदूर और फूल चढाये।
  • इस के बाद शिवलिंग पर फल अथवा प्रसाद चढाये।
  • भगवान शिव के शिवलिंग पर भांग, धतुरा,चंदन और अक्षत अवश्य चढाये।
  • इन सब कार्यो के बाद भगवान शिव के शिवलिंग की परिक्रमा की जाती है और मनोवांछित और की प्राप्ति की कामना की जाती है।
  • आखिरी मे धूप दीप से सबसे पहले भगवान गणेश की उसके बाद भगवान शिव की आरती करें।
  • तदुपरांत प्रसाद वितरण करें।
shiv ki pooja me kya kya chiye

नोट: यदि भगवान शिव का शिवलिंग न मिले तो भगवान शिव के मूर्ति रूप अथवा घर मे भगवान शिव की तस्वीर की भी पूजा कर सकते है।

इस दिन स्त्रियाँ विशेष रूप से तैयार होकर भगवान शिव की आराधना करती है। कहते है सावन माह मे सोमवार का व्रत अथवा पूजा कर ने से अच्छा वर मिलता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भी भगवान शिव को वर के रूप मे पाने के बाद श्रावण मास का 16 सोमवार का व्रत रखा था।सोमवार के व्रत मे फलाहार किया जाता है। यह व्रत निर्जला नही होता है इस व्रत मे दिन भर मे कोई भी फल खा सकते है।

जय जय शिव शंभूनाथ

                हर हर महादेव

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