वाराणसी में घूमने की जगह | Places to Visit in Varanasi

Varanasi places to visit- माँ गंगा के चरणों मे स्थित वाराणसी, बनारस या काशी उत्तर प्रदेश के पूर्व में बसा एक एतिहासिक नगर जो विश्व के सर्वाधिक प्राचीन नगरों में एक है, धार्मिक मान्यता के अनुसार काशी नगर की स्थापना स्वयं भगवान शिव ने की थी।

वरुणा और असि नदी के बीच बसे होने के कारण काशी को वाराणसी नाम से भी जाना जाने लगा, मुगल काल मे वाराणसी को बनारस नाम से जाना जाता रहा।

वाराणसी आज पूरे देश मे धर्म, संस्कृति, ज्ञान, और बनारसी साड़ी, अपने खानपान और विशेषकर बनारसी पान के लिए प्रसिद्ध है।

वाराणसी कैसे पहुँचे? | How to reach Varanasi

उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा पर स्थित वाराणसी नगर  सड़क, रेल और वायुमार्ग से जुड़ा है, वाराणसी के प्रमुख रेलवे स्टेशन वाराणसी, काशी, और बनारस (पूर्ववर्ती मडुआडीह) है जबकि बाबतपुर हवाई अड्डा वाराणसी को वायुमार्ग से सम्पूर्ण देश से जोड़ता है।

वाराणसी का धार्मिक महत्व क्या है?

प्राचीनतम नगर वाराणसी बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख ‘श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग’, पवित्र गंगा के मनोहर घाटों, श्री संकट मोचन मंदिर, भगवान बुद्ध द्वारा प्रथम उपदेश स्थल सारनाथ, संत रविदास तथा संत कबीरदास की जन्मस्थली होने के कारण धार्मिक रूप से प्रमुख दर्शनीय स्थल है।

वाराणसी के शैक्षणिक महत्व क्या है?

वाराणसी प्राचीन काल से ही शिक्षा और ज्ञान का केंद्र रहा है, वर्तमान में यहां विश्व प्रसिद्ध ‘बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय’, ‘डॉ संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय’, ‘काशी विद्यापीठ’ सम्पूर्ण भारत मे शिक्षा क्षेत्र में विशेष स्थान रखते है।

वाराणसी से संबंधित प्रमुख विभूतियाँ ?

ज्ञान और अध्यात्म के केंद्र वाराणसी गोस्वामी तुलसी दास, संत कबीरदास, वल्लभाचार्य, रामानंद, संत रविदास, मुंशी प्रेमचंद,आचार्य रामचंद्र शुक्ल, जयशंकर प्रसाद, पंडित रविशंकर, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, हरिप्रसाद चौरसिया जैसी विभूतियों का कर्मक्षेत्र रहा है।

वाराणसी पर्यटकों का एक पसंदीदा स्थल है यहां आने के लिए सबसे अच्छा मौसम अक्टूबर, नवंबर तथा फरवरी, मार्च होता है जब न अधिक ठंडी या गर्मी होती है।

प्रमुख स्थल | Places to Visit in Varanasi

  • गंगा घाट
    वाराणसी की आत्मा गंगा घाटों में बसती है, प्रमुख गंगा घाट, दशास्वमेघ, मणिकर्णिका, तथा अस्सी घाट है,जैन घाट, रीवां घाट आदि है। सायंकाल दशास्वमेघ घाट पर गंगा आरती सर्वाधिक दर्शनीय है। गंगा घाटों की मनोहारी छटा नाव या बोट से निहारने पर और अधिक बढ़ जाती है।
  • काशी विश्वनाथ मंदिर
    श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख ज्योतिर्लिंग है। काशी विश्वनाथ मंदिर मुगल आतंकों का साक्षी रहा है, अंतिम पुनर्निर्माण इंदौर की रानी अहिल्याबाई होल्कर ने सन 1780 में करवाया आज भी मंदिर का यही स्वरूप उपलब्ध है, मंदिर के दोनो शिखरों को स्वर्णमंडित पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह में करवाया था।
    सारे देश से शैव तथा वैष्णव सभी भगवान शिव के दर्शन करने वाराणसी आते है।
  • अन्नपूर्णा माता मंदिर
    अन्नपूर्णा माता मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर से सटा हुआ मंदिर है विश्वनाथ भगवान का दर्शन माता अन्नपूर्णा देवी के दर्शन पर ही पूर्ण माना जाता है
  • संकट मोचन मंदिर
    नगर स्थित संकट मोचन मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध मंदिर है, यहां प्रतिदिन हजारों लोग बजरंग बली का आशीर्वाद लेने आते है।
  • BHU स्थित विश्वनाथ मंदिर
    नवीन विश्वनाथ मंदिर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के वृहह परिषर में स्थित है, यह मंदिर आधुनिक शैली में निर्मित है, यहां शांत तथा स्वच्छ वातावरण मिलता है जहां बैठ मानसिक शांति की अनुभूति होती है।
  • गदौलिया चौक
    गदौलिया चौक गंगा घाट, विश्वनाथ मंदिर तथा नगर के प्रमुख मार्गों को जोड़ती है, यहां खरीदारी, खानपान तथा रहने को होटल, धर्मशाला आसानी से मिल जाते है, गदौलिया चौक तथा मंदिर मार्ग को नया रंगरोगन देकर दर्शनीय बनाया गया है।
  • सारनाथ
    सारनाथ वाराणसी से 10 किलोमीटर दूर स्थित बौद्ध धर्म का प्रमुख स्थल है, भगवान बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद प्रथम उपदेश यही दिया था। देश विदेश से बौद्ध धर्म के अनुयायी सारनाथ दर्शन करने आते है।

बनारस के विशेष आकर्षण

 ज्ञान, धर्म, संस्कृति, शिक्षा के साथ-साथ बनारस अपने अक्खड़पन मिजाज, बनारसी साड़ियां, बनारसी पान, कचौड़ी, जलेबी, ठंडाई, लस्सी, बनारसी चाट, और विशेष प्रकार की मिठाई मलइयो के लिए भी प्रसिद्ध है।

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