पाली, राजस्थान में घूमने की जगह | Places in Pali for Visit

पाली (pali) राजस्थान का एक जिला है जो जालौर और नागौर के पास स्थित है । इस जिले में कुल 9 तहसील है (मारवाड़ , बाली , पाली, सोजत , रायपुर , सुमेरपुर , देसूरी , रोहत और जैतारण)। पाली शहर का नाम यह इसलिए रखा गया क्योंकि यह पालीवालो का निवास स्थान हुआ करता था । यह जिला समुद्र तल से 214 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है ।

वैसे तो पूरा राजस्थान ही पर्यटकों के लिए किसी खूबसूरत पहेली से कम नहीं है परंतु पाली में भी ऐसी–ऐसी अनदेखी और अनोखी जगहें (places in pali) है जो अपने आप में ही एक खूबसूरत कहानी हैं।

ओम बन्ना मंदिर

पाली के एक “हाईवे” पर स्थित इस मंदिर की कहानी इतनी मशहूर है की कोई भी सवारी इनके दर्शन किए बिना अपने सफर में आगे नहीं चलते हैं। यहां के लोगों की तो यह भी मान्यता है की अगर कोई भी व्यक्ति या गाड़ी इनके दर्शन किए बिना अगर आगे चली जाती है तो उनके साथ कोई न कोई हादसा हो जाता है ।

तो आइए जानते है इसकी कहानी :–

दरअसल ओम सिंह राठौर पाली जिले में रहने वाले एक मामूली व्यक्ति था जो एक दिन इस रास्ते से अपने ससुराल से घर वापस आ रहे थे। रास्ते में ही उनकी बाइक का एक बहुत बड़ा एक्सीडेंट हो गया । और उसी वक्त उनकी मृत्यु हो गई ।

परंतु जब पुलिस वाले उस गाड़ी को थाने लेकर गए तो बार बार वह बाइक वही आकर खड़ी हो जाती थी जहां यह दुर्घटना हुई थी । जब बार–बार ऐसा होने लगा तो लोगों ने इसे ओम बन्ना की इच्छा समझ कर वही एक छोटा–सा चबूतरा बना कर बाइक को वही रहने दिया ।

इस दुर्घटना के बाद इस रास्ते पर और कोई दुर्घटना नहीं हुई और लोगो का विश्वास ओम बन्ना पर बढ़ता गया । लोग अपनी सफल और सुखी यात्रा के लिए इस मंदिर के दर्शन करने लगे और देखते ही देखते यह इतना प्रसिद्ध हो गया।    

शायद यह इकलौता ऐसा मंदिर होगा जहां भोग के नाम पर शराब चढ़ाई जाती हैं। दरअसल ओम बन्ना एक राजपूत थे और वे अकसर शराब भी पिया करते थे , इसलिए इस रास्ते से आने–जाने वाले वाहन–चालक ओम बन्ना के मंदिर में शराब अर्पित करते है ।

लाखोटिया बगीचा

लाखोटिया नदी के पास स्थित इस बगीचे का निर्माण तो शिव जी के मंदिर के लिए हुआ था जो इसके अंदर स्थित है परंतु अपनी सुंदर वनस्पति और पास ही में तालाब होने के कारण सभी पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करने में सफल रहा है यह बगीचा । बिल्कुल पाली के बीचों बीच स्थित इस जगह को पाली का दिल” कहना गलत नहीं होगा । यह किसी भी दिन , किसी भी मौसम में घर–परिवार वालो के साथ घूमने के लिए एक दम सही स्थान है । अगर आप सुबह जल्दी जाएंगे तो तालाब में बहुत सारी मछलियां भी देखने को मिल सकती है ।

जवाई बांध | Jawai Band

पाली जिले के सुमेरपुर तहसील में स्थित यह बांध जवाई नदी पर बनाया गया है । जवाई बांध पर्यटकों के लिए एक अच्छा स्थान है , खास कर कि प्रकृति–प्रेमियों के लिए । यहां पर उन्हें तेंदुए , मगरमच्छ, प्रवासी पक्षी , आदि पशु–पक्षी और हरियाली भी देखने को मिलेगी । खास कर कि सर्दी के मौसम में कई

प्रवासी पक्षी देखने को मिलते है जैसे कि रोबिन पक्षी , फ्लेमिंगो, आदि । क्योंकि पास ही में जवाई पर्वत और जवाई नदी है जो इस जगह की सुंदरता को और भी बड़ा देते है ।

अधिक जानकारी के लिए – Jawai Bandh | जवाई बांध : संपूर्ण जानकारी

परशुराम महादेव मंदिर

यह मंदिर पूरी तरह से पाली जिले में स्थित नहीं है। यह मंदिर पाली और राजसमंद की सीमा में पहाड़ों में स्थित है । शिव जी का यह मंदिर इसकी गुफाओं की वजह से प्रचलित है ।

मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 500 से 600 सीढ़िया चढ़नी पड़ती है । परंतु वादियों के बीच से जाता हुआ यह रास्ता ही इस यात्रा को रोमांचक बनाता है । अगर आप खुशकिस्मत हुए तो बारिश के मौसम में यहां पर झरने भी देखने को मिलते है ।

माना जाता है कि प्रभु परशुराम जी इन्हीं गुफाओं में कभी राम भगवान का ध्यान किया करते थे ।

रणकपुर जैन मंदिर

तीर्थंकर ऋषभनाथ (आदिनाथ) के लिए बनाया गया यह मंदिर इतना प्रसिद्ध इसलिए है क्योंकि यह जोधपुर और उदयपुर के बिल्कुल बीच में स्थित अरावली के पर्वतों के बीच हैं। पाली जिले के सादडी गांव के रणकपुर में स्थित इस मंदिर को चौमुखा मंदिर भी कहा जाता है क्योंकि इस मंदिर के चारद्वार है।

यह मंदिर अपनी वास्तुकला और नक्काशी के लिए बहुत प्रसिद्ध है । इस मंदिर में कुल 1444 स्तम्भ है परंतु किसी भी 2 स्तंभों की डिज़ाइन एक जैसी नहीं है। यह पूरा मंदिर सफेद संगमरमर से 15 वी सदी में बनाया गया था।

यह मंदिर एक ही संगमरमर के टुकड़े से बनी पार्श्वनाथ कि मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है । मूर्ति में 1008 सांप के सिर और पूछें है । पार्श्वनाथ कि मूर्ति को शुद्ध करने के लिए 2 हाथी भी हैं।

पर्यटक यहां आकर जंगल सफारी का भी आनंद ले सकते है ।

हर हर गंगे (बिजापुर)

बहुत ही कम लोगों ने इस जगह का नाम सुना होगा । बिजापुर नामक एक छोटे से गांव में स्थित यह जगह शायद ज्यादा प्रचलित ना होने की वजह से ही इतनी खूबसूरत और शांत है ।

महादेव जी का मंदिर जो पर्वत की चोटी पर स्थित है उस तक पहुंचने का मार्ग ही इतना खूबसूरत है कि मन मोहित हो जाता है ।

बारिश के मौसम में झरने की आवाज तो 3-4 किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है । प्रकृति–प्रेमियों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है । ना ही इधर कोई प्रदूषण है और न ही ज्यादा लोग ।

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