नवरात्रि | Navratri: विवरण, महत्व और तथ्य | Importance and Facts

Navratri हिन्दुओ का प्रमुख पर्व है। यह त्यौहार एक वर्ष मे दो बार मनाया जाता है लेकिन शरद मास के नवरात्र को बहुत ही धूमधाम से पूरे भारतवर्ष मे विशेषतः पश्चिम बंगाल मे मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल मे नवरात्र को दुर्गा पूजा तो गुजरात एवं महाराष्ट्र मे नवरात्रि के पर्व के नाम से जाना जाता है।
इस त्यौहार और पूजा-पाठ मे मुख्य रूप से देवी की शक्ति रूप की पूजा होती है। गुजरात मे पूरी नवरात्रि गरबा और डांडिया खेला जाता है तो वही मैसूर मे मैसूर महल को पूरे महीनेभर प्रकाशित किया जाता है।

नामकरण  

नवरात्रि  का शाब्दिक अर्थ है नौ देवियो की नौ रात (रात्रि) तक पूजा व अनुष्ठान करना। नवरात्रि मे प्रमुख रूप से तीन देवियो और उन के प्रतिरूपो की पूजा व अनुष्ठान धूमधाम से की जाती है। ये तीन प्रमुख देवियाँ है श्री महालक्ष्मी, महा सरस्वती, और श्री महाकाली। इनके प्रतिरूप है शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री।

नौ देवियो के नाम  व स्थान | Navratri 9 Devi Names

  1. शैलपुत्री– नवरात्र के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा होती है। यह हिमालय पर्वत की पुत्री है। शैल का अर्थ पर्वत होता है इसलिए इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। इनका वाहन वृषभ है और इन के दाँए हाथ मे त्रिशूल और बांए हाथ मे कमल का फूल शुसोभित है।

    वन्दे वांछितलाभाय, चंद्रार्धकृतशेखराम।
    वृषारूढ़ां शूलधरां, शैलपुत्रीं यशस्विनीम।।

  2. ब्रह्मचारिणी– नवरात्र के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। त्याग, वैराग्य, संयम,एवं सदाचार की वृद्धि के लिए माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इनके दांए हाथ मे जप की माला है तो दूसरे हाथ मे कमंडल।

    दधाना करपाद्माभ्याम, अक्षमालाकमण्डलु।
    देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

  3. चंद्रघंटा – नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इनके माथे पर अर्द्ध रूपी चंदा के समान घंटा है। इस लिए इन को चंद्रघंटा के नाम से जानते है। इन की सवारी शेर है। इन की पूजा कर ने से सौम्यता और निर्भयता का शरीर मे संचार होता है। इनके दसो हाथो मे शस्त्र विराजमान है।

    पिंडजप्रवरारूढ़ा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
    प्रसादं तनुते मह्मं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।

  4. कुष्मांडा– नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। इनके आठ हाथ है। जिन मे कमल फूल के साथ अमृत कलश भी है। इन की पूजा करने से आयु एवं यश मे वृद्धि होती है।

    सुरासंपूर्णकलशं, रुधिराप्लुतमेव च।
    दधाना हस्तपद्माभ्यां, कूष्मांडा शुभदास्तु मे।

  5. स्कंदमाता– नवरात्र के पाँचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। माता पार्वती के छह मुख वाले पुत्र होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा। इनकी पूजा से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    सिंहासनगता नित्यं, पद्माश्रितकरद्वया।
    शुभदास्तु सदा देवी, स्कंदमाता यशस्विनी।

  6. कात्यायनी– नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। महर्षि कात्यायन के यहाँ जन्म लेने से इनका नाम कात्यायनी पड़ा। इन की पूजा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    चंद्रहासोज्जवलकरा, शार्दूलवरवाहना।
    कात्यायनी शुभं दद्यात्, देवी दानवघातिनी।।

  7. कालरात्रि– नवरात्र के सातवे दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। यह माँ असुरो का नाश करती है।

    एकवेणी जपाकर्ण, पूरा नग्ना खरास्थिता।
    लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी, तैलाभ्यक्तशरीरिणी।।
    वामपादोल्लसल्लोह, लताकंटकभूषणा।
    वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा, कालरात्रिभयंकरी।।

  8. महागौरी– नवरात्र के आठवे दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। इन के आभूषण, वस्त्र और वर्ण सभी सफेद रंग के है।

    श्र्वेते वृषे समारूढा, श्र्वेतांबरधरा शुचि:।
    महागौरी शुभं दद्यात्, महादेवप्रमोददाद।।

  9. सिद्धिदात्री– नवरात्र के नवे दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। यह सभी सिद्धयो को सिद्ध करती है।

    सिद्धंगधर्वयक्षाद्यै:, असुरैरमरैरपि।
    सेव्यमाना सदा भूयात्, सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।

नवरात्रि की प्रचलित कहानियाँ | Stories Behind Navratri

  • भगवान श्रीराम का चंडी देवी का आव्हान

रावण पर विजय प्राप्त कर ने के लिए और माता सीता को रावण के कैद से छुड़ाने के लिए भगवान श्रीराम ने माता चंडी की उपासना की और रावण पर विजय प्राप्त की इसी विजय के उपलक्ष्य मे दशमी के दिन को दशहरा के रूप मे मनाते है।और रावण का पुतला जलाते है।

  • माता दुर्गा द्वारा राक्षस महिषासुर का वध

जब पृथ्वी पर राक्षस महिषासुर का अत्याचार अति हो गया तो देवताओ ने मिलकर देवी दुर्गा का आव्हान किया और माँ दुर्गा ने सिंह की सवारी पर बैठकर महिषासुर का वध त्रिशूल से किया। यह लड़ाई नौ दिन तक चली इसीलिए माता दुर्गा की पूजा भी नौ दिन तक धूमधाम से मनाया जाता है।

नवरात्रि करने की विधि

नवरात्र मे माता दुर्गा के सामने कलश स्थापित करते है साथ ही रोली, चंदन ,कुमकुम और फूलो से उनका श्रृंगार करते है और दुर्गा सप्तशती का पाठ नौ दिन तक करते है।कुछ भक्तगण उपवास भी रखते है।

नवरात्रि का महत्व

नवरात्रि मे माता के नौ रूप की पूजा करने से जीवन मे सकारात्मकता का संचार होता है। इस पूजा से मन को बुद्धि व सिद्धि प्राप्त होती है जिससे धन, यश मे वृद्धि होती है।

नवरात्रि पर्व का तथ्य

वैज्ञानिको के अनुसार नवरात्र  माह मे जीवानुओ का खतरा बहुत होता है लेकिन नवरात्रि के दौरान लोग शुद्ध भोजन लेते है और सही समय पर अपना कार्य भी करते है जो शरीर को स्वस्थ रखती है और जीवानुओ का खतरा कम हो जाता है।इस लिए वैज्ञानिको का भी मानना है कि शरद मास मे पूजा-पाठ करनी चाहिए।

नवरात्रि का त्यौहार लोगो के जीवन मे सकारात्मकता लाती है इस त्यौहार मे बताया जाता है कि बुराई पर हमेशा अच्छाई की जीत होती है।

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