मकर संक्रान्ति का महत्व | Importance of Makar Sankranti

जब पौष मास मे सूर्य मकर राशि पर आता है तब Makar Sankranti मनाई जाती है। इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि मे प्रवेश करता है। और सामान्यतः लोग इसे जनवरी के 14 या 15 तारीख को मनाते है। मकर संक्रान्ति पूरे भारतवर्ष मे मनाई जाती है। केरल, कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कह कर मनाते हैं। जबकि तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं। तो राजस्थान में इस पर्व पर सुहागन महिलाएँ अपनी सास को वायना देकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। पूरे भारतवर्ष मे मकर संक्रान्ति विभिन्न नाम से जानी और मनाई जाती है।

मकर संक्रान्ति क्यो मनाई जाती है?

ऐसा माना जाता  है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते है। क्योकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। एक कथा के अनुसार महाभारत काल में भी भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए Makar Sankranti के  दिन को ही चुना था। एक प्रचलित कथा यह भी है कि मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं।

मकर संक्रान्ति कैसे मनाई जाती है? | How to Celebrate Makar Sankranti

भारत विविधताओ का देश है।एक ही त्यौहार को प्रत्येक राज्य अपनी तरह से धूमधाम से मनाता है। मकर संक्रान्ति मे भी प्रत्येक राज्य इसे अपने तरीके से मनाता है।

बिहार और उत्तर प्रदेश: इस दिन बिहार और उत्तर प्रदेश राज्य मे घरो मे खिचड़ी बनाई जाती है।साथ ही इस दिन दही चूड़ा और तिलकुट भी खाया जाता है। इस दिन चावल, तिल, चिवड़ा, गौ, स्वर्ण, कम्बल आदि दान करने की मान्यता है।

पश्चिम बंगाल: इस दिन पश्चिम बंगाल मे गंगासागर मे स्नान को विशेष महत्व दिया गया है। यहाँ पर स्नान कर ने के बाद तिल दान कर ने का भी महत्व है।

राजस्थान: इस दिन सुहागिन महिलाएँ अपनी सास को उपहार देकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। और साथ ही साथ महिलाएँ कोई भी सौभाग्यसूचक वस्तु  चौदह की संख्या में पूजन एवं संकल्प कर चौदहो ब्राह्मणों को दान मे दे देती हैं।

तमिलनाडु: इस दिन तमिलनाडु में पोंगल के रूप में यह पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। पहला दिन कूड़ा करकट इकठ्ठा कर जलाया जाता है, दूसरे दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है और तीसरे दिन पशु धन की पूजा की होती है। पोंगल मनाने के लिये स्नान करके खुले आँगन में मिट्टी के बर्तन में खीर बनायी जाती है, जिसे पोंगल कहते हैं. इसके बाद सूर्य देव को नैवैद्य चढ़ाया जाता है। इस दिन बेटी और दामाद का विशेष रूप से स्वागत किया जाता है।

sankranti lohri 2022
Makar Sakranti

हरियाणा और पंजाब :  इस दिन  हरियाणा और पंजाब मे लोहड़ी के रूप मे मनाया जाता है।  इस दिन अँधेरा होते ही आग जलाकर अग्निदेव की पूजा करते हुए तिल, गुड, चावल और भुने हुए मक्के की आहुति दी जाती है। बहुएँ घर-घर जाकर लोकगीत गाती हैं और और मूंगफली, तिल की बनी हुई गजक और रेवड़ियाँ आपस में बांटकर खाती है। इस अवसर पर लोग मक्के की रोटी और सरसों का साग का भी खाते हैं।

मकर संक्रान्ति का महत्व

यह पर्व उत्तरायण मे होता है और उत्तरायण को देवताओ का दिन माना गया है। कहा जाता है इस दिन दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक कार्य कर ने से पुण्य मिलता है। यह त्यौहार प्रकृति के लिए भी मनाया जाता है।

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