करणी माता मंदिर, बीकानेर | Karni Mata Mandir- Rat Temple of India

राजस्थान राज्य के बीकानेर जिले से लगभग 30 किमी दूर देशनोक नामक स्थान पर Karni Mata Mandir का मंदिर है। यह मंदिर एक प्रसिद्ध हिंदु और लोक मंदिर है। यह मंदिर सफेद चूहों के कारण भी प्रसिद्ध है। ऐसा कहा जाता है कि माता करणी का जन्म चारण कुल मे हुआ था। इस मंदिर मे करीब 25000 चूहों का घर है।इसीलिए करणी माता के मंदिर को चूहों का मंदिर भी कहते है।

करणी माता की कथा | Karni Mata Story

प्रचलित कथनानुसार माता करणी जी का जन्म चारण कुल में अश्विनी शुक्ल सप्तमी शुक्रवार 20सितम्बर, 1387 ई. को हुआ था।माता करणी ने जन हितार्थ के लिए  जंगल प्रदेश को अपनी कार्यस्थली बनाया। माता करणी ने ही राव बीका को जांगल प्रदेश में राज्य स्थापित करने का आशीर्वाद दिया था। करणी माता ने देशनोक में दस हजार बीघा ‘ओरण’ (चारागाह) के लिए जमीन दी थी।माता करणी की गायों का चरवाहाऔर रक्षक दशरथ मेघवाल था।

डाकू पेंथड़ और पूजा महला से गायों की रक्षार्थ लिए लड़ते हुए दशरथ मेघवाल ने अपने प्राण त्याग दिये थे। तब करणी माता ने डाकू पेंथड़ व पूजा महला का अंत कर दशरथ मेघवाल को पूज्यनीय बनाया जो सामाजिक  समरसता का प्रतीक है। ऐसा भी माना जाता है कि माता करणी 151 वर्ष तक जीवित रही।चारण कुल के लोग बताते हैं कि संवत 1595 की चैत्र शुक्ल नवमी गुरुवार को माता  करणी ज्योर्तिलीन हुईं। संवत 1595 की चैत्र शुक्ला 14 से यहां श्र करणी माता जी की पूजा- अर्चना और सेवा होती चली आ रही है।

करणी माता मंदिर और चूहों का राज | Karni Mata Mandir

एक प्रचलित कथनानुसार एक बार करणी माता का सौतेला पुत्र (उसकी बहन गुलाब और उसके पति का पुत्र) लक्ष्मण कोलायत में स्थित कपिल सरोवर में पानी पीने की लिए गया और पानी पीने की कोशिश में डूब कर मर गया।

जब करणी माता को यह सूचना मिली  तो उन्होंने, मृत्यु के देवता यम को पुत्र को पुन: जीवित करने की प्रार्थना की। पहले तो यम देव  ने मना किया पर बाद में  विवश होकर यम देव ने पुत्र को चूहे के रूप में पुनर्जीवित कर दिया।तब से करणी माता मंदिर में रहने वाले चूहे माँ की संतान माने जाते है। मंदिर परिसर मे रहने वाले चूहों को काबा कहा जाता है। करणी माँ को चढ़ाये जाने वाले प्रसाद को पहले चूहे खाते है फिर उसे बाँटा जाता है।ऐसी मान्यता है कि यदि सफेद चूहा माता के मंदिर मे दिख जाए तो मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।इस मंदिर मे वर्ष मे दो बार मेला लगता है।एक चैत्र नवरात्र पर्व पर और दूसरी बार अश्विन नवरात्र पर्व पर। इस मेले मे बड़ी मात्रा मे श्रद्धालु आते है।

करणी माता मंदिर का स्थापत्य एवं शिल्पकला

इतिहासकारो के अनुसार करणी माता मंदिर का निर्माण 15 वीं-20 वीं शताब्दी के तत्कालीन शासक बीकानेर के महाराजा गंग सिंह ने करवाया था। यह मन्दिर राजपूत शैली मे बनी हुई है। इस मंदिर के सामने दरवाजे पर चांदी का दरवाजा बनाया गया है जो महाराजा गंग सिंह ने बनवाए थे। इस मंदिर के गर्भ गृह के बीचों-बीच माता करणी विराजमान है।1999 ई.मे हैदराबाद निवासी कुंदन लाल वर्मा ने करणी माता मंदिर के परिसर को और विस्तार कर दिया।

करणी माता मंदिर कैसे पहुँचे | How to reach Karni Mata

रेल मार्ग करणी माता मंदिर  देशनोक रेलवे-स्टेशन के एकदम करीब है यदि दूरी की बात की जाये तो यह आधा किमी भी नही है।देशनोक रेलवे-स्टेशन बीकानेर- जोधपुर रेलवे-स्टेशन के बीच मे है।इस लिए देशनोक स्टेशन पहुंचना आसान है।

सड़क मार्ग बीकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग  NH 11 के रास्ते आसानी से करणी माता का मंदिर पहुंचा जा सकता है।इसके लिए बसें, और पराईबेट गाडिय़ा भी उपलब्ध है।

वायु मार्ग- बीकानेर सिविल एयरपोर्ट से भी लोग निजी वाहनो मे करणी माता के मंदिर जा सकते है।

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