जयसमंद झील | Jaisamand Lake – मानव निर्मित झील

“झीलों की नगरी” उदयपुर में स्थित यह झील, एशिया की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम ताजे पानी की झील है (पहले नंबर पर गोविंद सागर झील) और राजस्थान की सबसे बड़ी झील है।

यह बात अपने आप में ही बहुत रोमांचक है कि भारत की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झील भारत के सबसे सूखे राज्य में स्थित है। इसे “ढेबर झील” के नाम से भी जाना जाता है। यह झील 102 फीट गहरी है और 36 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है।

यह उदयपुर से लगभग 48 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस झील का पानी आता भी गोमती नदी से है और जाता भी गोमती नदी में है। हालांकि आपको बता दें कि पहले कुल 9 नदियों का पानी इस झील में आता था परंतु अब ऐसा नहीं है। सिर्फ गोमती नदी का पानी ही यहां एकत्र होता है।

फसलों की सिंचाई के लिए इस झील से दो नहरें भी निकाली गई हैं। उदयपुर की अधिकतर फसलों की सिंचाई और पेयजल की पूर्ति इसी झील से होती है। पूरे वर्ष किसान इसके लबालब होने का इंतजार करते हैं।

संगमरमर के बांध पर भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर

इस झील का निर्माण 1685 में महाराजा जय सिंह ने करवाया था। प्रजा में पानी की कमी होने के कारण इस झील का निर्माण करवाया गया था। राजा जय सिंह ने गोमती नदी पर एक संगमरमर के बांध का निर्माण करवाया और उसके एकदम बीचो-बीच एक शिव का मंदिर बनवाया। यह बांध लगभग 35 मीटर ऊंचा है।

इस मंदिर के कारण जयसमंद झील की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। ऊपर से 6 संगमरमर की छत्रियों के निर्माण के कारण इसकी सुंदरता पर चार चांद लग जाते हैं। झील के तट पर एक संगमरमर का हाथी भी बनवाया गया है जो इस झील की शोभा को और बढ़ाता है।

इस बांध का निर्माण पूर्ण होने से महाराजा जयसिंह इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने अपने वज़न जितना सोना प्रजा में बांट दिया। झील के दोनों नाम भी उन्होंने अपने नाम पर ही रखें है। ढेबर उनके बचपन का नाम हुआ करता था।

 आज के समय में यह बांध “भारत के विरासत स्मारकों” की सूची में शामिल है।

“हवा महल” (रूठी रानी का महल)

यह महल तलहटी पर स्थित है और पूरी तरह से जयसमंद झील से घिरा हुआ है। वास्तुकला की बात करें तो इस महल के प्रांगण में 12 खंभों वाला एक मंडप है। वैसे तो यह महल ज्यादा बड़ा नहीं है परंतु इसकी वास्तुकला प्रशंसनीय है।

यह महल महाराजा ने अपनी सबसे छोटी रानी “कमला देवी” को भेंट के स्वरूप में दिया था । सारी रानियां गर्मियों के समय यहीं आकर निवास करती थी। झील के बिल्कुल पास होने के कारण गर्मियों के लिए यह महल एकदम उपयुक्त था । इसीलिए इसे “हवा महल” कहा जाता था।

परंतु जब रानी को महाराजा से धोखा मिला और उनका दिल टूट गया तो उन्होंने यह कसम खाई कि वह कभी भी राजा के साथ नहीं रहेंगी और हमेशा यही निवास करेंगी। तब से इसे “रूठी रानी का महल” कहा जाने लगा। अब इस महल की स्थिति उतनी अच्छी नहीं है और यह भी कहा जाता है कि यह महल भूतिया है।

शायद रानी का दुःख कभी कम ही नहीं हुआ और यह महल भूतिया बन गया। अगर आप में थोड़ी हिम्मत और बहुत कोतूहल है तो झील के पास स्थित इस महल में भी जरूर जाएं। 

क्यों दिखते हैं झील के आसपास खंडहर ?

गर्मियों के समय जब झील के पानी का स्तर कम हो जाता है तब कुछ खंडहर झील के तट के आसपास दिखने लगते हैं । माना जाता है कि यह खंडहर उन गांवों के हैं जो कभी बाढ़ के कारण नष्ट हो गए थे । हालांकि इस बात का कोई प्रमाण अभी हमारे पास नहीं है ।

जयसमंद वन्यजीव अभयारण्य (जयसमंद वाइल्ड लाइफ सेंचुरी )

यह सेंचुरी ज्यादातर “सूखे पर्णपाती जंगल” के सागौन के पेड़ों  को अपने अंदर शामिल करती है। यह लगभग 62 वर्ग किलोमीटर तक फैली हुई है। इसका निर्माण 1957 में हुआ था ।

पहले यह मेवाड़ के राजाओं का एक शिकार रिजर्व हुआ करता था परंतु अब इसे पशु पक्षियों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह सेंचुरी बहुत से प्रवासी और निवासी पशु पक्षियों का घर है। पर्यटकों को यहां लोमड़ी, हिरण, जंगली सूअर, तेंदुआ, लकड़बग्घा, जंगली बिल्ली, आदि जैसे बहुत से वन्यजीव देखने को मिलेंगे।

जयसमंद झील के बिल्कुल नजदीक स्थित होने के कारण यह सेंचुरी बहुत सारे जलीय जानवरों का भी घर है। जैसे कि मगरमच्छ, कछुए, और कई अलग-अलग प्रकार की मछलियाँ।

सिर्फ 80 रुपए की टिकट लेकर पर्यटक इस अति सुंदर सेंचुरी में घूम सकते हैं। साथ ही 30 रुपए की टिकट लेकर नाव तैराकी का भी आनंद ले सकते हैं। यह सारी सुविधाएं सुबह 10:00 बजे से लेकर शाम के 5:00 बजे तक खुली रहती हैं।

इस झील के तीन द्वीप

जयसमंद झील में कुल 3 द्वीप स्थित है।  दो बड़े द्वीपों को “बाबा का मगरा” के नाम से जाना जाता है और छोटे द्वीप को “पियारी” के नाम से जाना जाता है।

इनमें से एक द्वीप पर भीलमीणा जनजाति निवास करती है। इन्हें भील जनजाति और मीणा जनजाति का मिश्रण माना जाता है। एक द्वीप पर जयसमंद आईलैंड रिजॉर्ट भी है जिसकी गणना भारत के सबसे आलीशान और महंगे रिजॉर्ट में की जाती है। 

कब और कैसे पहुंचे जयसमंद झील

साल का कौन सा माह होगा सबसे उपयुक्त ? :- वैसे तो पूरे वर्ष ही यह झील अत्यंत मनमोहक लगती है परंतु जुलाई और अगस्त का महीना ज़्यादा उपयुक्त होगा यहां पर्यटन करने के लिए। चूंकि उदयपुर राजस्थान का हिस्सा है इसीलिए पूरे साल यहां अत्यंत गर्मी रहती है। जुलाई और अगस्त में पर्यटकों को उतनी परेशानी नहीं होगी ।

हवाई मार्ग :- उदयपुर का डबोक हवाई अड्डा यहां से 21 किलोमीटर की दूरी पर है ।

रेल मार्ग :– रेलवे स्टेशन 57 किलोमीटर की दूरी पर है।

पर्यटक किसी भी मार्ग से यहां अत्यंत आसानी से पहुंच सकते हैं। अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित इस झील की खूबसूरती पर्यटकों का मन मोह लेती है। अगर आप उदयपुर भ्रमण के लिए जा रहे हैं तो जयसमंद झील में नाव तैराकी करना बिल्कुल ना भूलें। 

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