Indian Pangolin | एक अनोखी प्रजाति : पैंगोलिन

पैंगोलिन (pangolin) एक प्रकार का स्तनधारी जीव है। यह जानवर दिखने में छिपकली और सांप की भांति प्रतीत होता है। यह एक शर्मीले प्रकृति का जीव होता है। पैंगोलिन (pangolin) जीव की चमड़ी की संरचना टाइल्स के छोटे छोटे सेल की तरह की होती है। इस जीव की खासियत यह है कि खतरे का आभास या आशंका होते ही यह खुद को कुंडली मार कर छिपा लेता है। माना जाता है धरती पर इस जीव की प्रजाति करीब करीब लगभग 60 मिलियन वर्षों पुरानी है।

पैंगोलिन (pangolin) के शरीर का रंग सुनहरा-भूरा, काला-भूरा और गहरा हरा-भूरा रंग का होता है। पैंगोलिन (pangolin) मुख्य रूप से  एशिया और अफ्रीका में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। इस जीव को भारत में सल्लू साँप भी कहते हैं क्योंकि यह जीव देखने में सांप की भांति प्रतीत होता है। पैंगोलिन (pangolin) मुख्य रूप से दीमक और चीटियां खाता है। इसलिए इसे  anteater भी कहते है। पैंगोलिन (Indian pangolin) को भारत में वज्रशल्क के नाम से भी जाना जाता है।

Indian पैंगोलिन (Pangolin) जीव का आवास

इंडियन पैंगोलिन (Indian Pangolin) जीव मुख्य रूप से भारत के शुष्क क्षेत्र में पाया जाता है। इंडियन पैंगोलिन (pangolin) की प्रजाति पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, और नेपाल में भी पाई जाती है। चीनी पैंगोलिन (pangolin) जीव की प्रजाति पूर्वी नेपाल में हिमालय की तलहटी के क्षेत्र, उत्तरी भारत, भूटान, दक्षिणी चीन और उत्तर-पूर्वी बांग्लादेश में पाया जाता है।

पैंगोलिन (Pangolin) एक नजर में

  • जगत- जंतु
  • संघ – रज्जुकी (Chordata)
  • वर्ग – स्तनधारी (Mammalia)
  • गण – फ़ोलीडोटा (Pholidota)
  • कुल – मैनिडाए (Manidae)
  • वैज्ञानिक नाम – मैनिस क्रैसिकाउडाटा (Manis crassicaudata)

पैंगोलिन (Pangolin) जीव के फायदे

  • इस जीव के खाल से कई प्रकार की दवाईयां बनाई जाती है।
  • पैंगोलिन (pangolin) जीव के मांस से पारंपरिक दवाईयां बनाई जाती है।
  • Pangolin जीव के मांस को भी खूब चाव से खाया जाता है।
  • पैंगोलिन के स्कीन मतलब शरीर की ऊपरी परत जो बहुत कड़ी होती है उस से बनने वाली दवा चॉकलेट की तरह दिखती हैं।उसे अल्कोहल अथवा गर्म पानी में घोलकर पिया जाता है।
  • इस से सेक्सुअल पावर बढ़ाने की दवाइयां भी बनती है।

Pangolin Smuggling | पैंगोलिन (Pangolin) की तस्करी

पैंगोलिन (pangolin) जीव अपने खाल और मांस के कारण बड़े पैमाने पर तस्कर किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक पैंगोलिन की कीमत लगभग 20 लाख रुपए से अधिक ही होती है। पैंगोलिन (pangolin) के केवल एक किलो मांस की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 27,000 रूपए है।भारतीय शिकारी एक पैंगोलिन (pangolin) के अंगों को 20 हजार रुपए तक में बेच देते हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार माना जाता है कि विश्वभर में वन्य जीव- जंतु की अवैध तस्करी में अकेले ही  20 फीसदी का योगदान पैंगोलिन (pangolin) जीव का है।

विशेषरूप से चीन में पैंगोलिन (pangolin) जीव का अवैध व्यापार अधिक होता है क्योंकि यहाँ डिमांड अधिकहै। चीन में आधिकारिक रूप से पैंगोलिन (pangolin) जीव के मांस और खाल से पारंपरिक दवाईयां बनाई जा रही है। यह जीव इतना मंहगा और अनमोल है कि यह अन्य जीव की भांति वेट मार्केट में दूसरे कम कीमत के सस्ते जीवों के साथ नहीं बिकता, बल्कि इस जीव को केवल महंगे रेस्त्रां ही बेचते और पकाते हैं। इस जीव के मांस और खाल से बनने वाली दवाएं बहुत ही महंगे दामों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिकती हैं। इस जीव की दवाई बनाने का मुख्य देश चीन है। चीन में बनी दवाई थाईलैंड से म्यांमार, सिंगापुर, पाकिस्तान, और इंडोनेशिया में भेजी जाती हैं।

यही वजह है कि पैंगोलिन (pangolin) जीव की तस्करी इतनी तेजी से हो रही है कि अब यह प्रजाति विलुप्त होने वाले जीवों की श्रेणी में पहुंच गया हैं।

पैंगोलिन (Pangolin) जीव की प्रजाति

पैंगोलिन (pangolin) जीव की आठ प्रजातियों होती है जिस में से इंडियन पैंगोलिन (pangolin)और चीनी पैंगोलिन (pangolin) की प्रजाति केवल भारत में पाई जाती हैं। इंडियन पैंगोलिन (pangolin) प्रजाति बहुत चींटीखोर (Anteater) होता है और इसकी पीठ पर शल्कनुमा तरह की 11 से 13 पंक्तियाँ होती हैं। इंडियन पैंगोलिन (pangolin) प्रजाति की पूँछ के निचले हिस्से की तरफ एक टर्मिनल स्केल होता है जो इंडियन पैंगोलिन (pangolin) प्रजाति को चीनी  पैंगोलिन(pangolin)  प्रजाति से अलग करता है।

Indian Pangolin Conservation |पैंगोलिन का संरक्षण

भारत देश में पैंगोलिन (pangolin) के शिकार पर मनाही है। पैंगोलिन (pangolin) के प्रजाति के संरक्षण का कार्य भारत में बहुत तेज़ी से चल रहा है।पैंगोलिन (pangolin) जीव की महता और तेजी से विलुप्त होने के कारण इस जीव को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची के प्रथम में रखा गया है। इस अधिनियम के अंतर्गत वन्यजीवों का अवैध शिकार और उसके माँस और खाल के  कारण व्यापार पर रोक लगाई गई है। यदि कोई इस प्रावधान को तोड़ता है है तो इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले नियम और कानून के तहत इसमें जुर्माना और कठोर दण्ड का वह व्यक्ति भागी होगा। अनुसूची-1 तथा अनुसूची-2 के द्वितीय भाग के अंतर्गत वन्यजीवन को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने का प्रावधान है| यदि इन अधिनियमो का उल्लंघन होता हुआ देखा अथवा पाया जाता है तो इसके लिए जुर्माना और कठोर दण्ड का प्रावधान भी है।

विश्व पैंगोलिन (Pangolin) दिवस

विश्व पैंगोलिन दिवस प्रत्येक वर्ष के फरवरी माह के तीसरे हफ्ते के शनिवार को मनाया जाता है इसका मुख्य व मूल उद्देश्य पैंगोलिन नामक जीव के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना और प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाने के लिये लोगो को एक साथ मंच पर लाने का एक अंतरराष्ट्रीय प्रयास है।

Reference Articles:
Wiki – pangolin

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