हर की पौड़ी, हरिद्वार | Har ki pauri, Haridwar- इतिहास, महत्व

हर की पौड़ी भारतीय राज्य उत्तराखंड में हरिद्वार में गंगा के तट पर एक प्रसिद्ध घाट है। यह श्रद्धेय स्थान पवित्र शहर हरिद्वार का प्रमुख स्थल है। शाब्दिक रूप से, “हर” का अर्थ है “भगवान” और “पौड़ी” का अर्थ है “कदम”। माना जाता है कि भगवान विष्णु ने वैदिक काल में हर की पौड़ी में ब्रह्मकुंड का दौरा किया था।

ऐसा माना जाता है कि यह वही स्थान है जहाँ से गंगा पहाड़ों को छोड़कर मैदानों में प्रवेश करती है। घाट गंगा नदी के पश्चिमी तट पर है जिसके माध्यम से गंगा को उत्तर की ओर मोड़ दिया जाता है। हर की पौड़ी वह क्षेत्र भी है जहां हजारों तीर्थयात्री जुटते हैं और प्रत्येक बारह साल मे लगने वाले कुंभ मेले में और हर छह साल में लगने वाले अर्ध कुंभ मेले में भाग लेते हैं। इसके अलावा पंजाब का प्रसिद्ध पर्व वैसाखी भी यहाँ मनाया जाता है जिसके लिए भक्त उमड़ते है।

हर की पौड़ी का इतिहास

कहा जाता है कि राजा विक्रमादित्य ने इसे पहली शताब्दी ईसा पूर्व में अपने भाई भर्तृहरि जो यहां गंगा के तट पर ध्यान करने आए थे, की याद में बनवाया था। हर की पौड़ी के भीतर एक अत्यंत पवित्र क्षेत्र है जिसे ब्रह्मकुंड के रूप में जाना जाता है यहाँ शाम की गंगा आरती होती है। यह वह स्थान माना जाता है जहां समुद्र मंथन के बाद गरुड़ द्वारा ले जाए जा रहे घड़े में से अमृत की बूंदें आकाश से गिरी थीं। हर की पौड़ी घाट पर हर दिन सैकड़ों लोग गंगा के पानी में डुबकी लगाते हैं। यह स्थान बहुत ही शुभ माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में कुंभ मेलों में भीड़ बढ़ने की वजह से घाट का अत्यधिक  विस्तार और नवीनीकरण हुआ है। यहाँ बने हुए अधिकांश मंदिर 19वीं शताब्दी के अंत में बने हैं।

घाटों का विस्तार पहले 1938 में हुआ (जो कि उत्तर प्रदेश के आगरा के एक जमींदार हरज्ञान सिंह कटारा द्वारा किया गया), और उसके बाद 1986 में किया गया।

हर की पौड़ी का महत्व

उत्तराखंड के आध्यात्मिक दौरे पर लोगों के लिए मुख्य आकर्षणों में से एक, हर की पौड़ी हरिद्वार का चिरस्थायी मील का पत्थर है। वर्तमान में, हर की पौड़ी गंगा नदी के तट पर एक घाट है और अक्सर धार्मिक स्नान की प्रतीक्षा में साधुओं, संन्यासियों, पुजारी और भक्तों से भरा रहता है। ऐसा माना जाता है कि हर की पौड़ी से बहने वाली अमृत से भरी गंगा में कुछ शक्तियां होती हैं, जो ‘पापियों’ के शरीर और आत्मा को शुद्ध कर सकती हैं।

इसके अलावा, लोग किसी प्रियजन के निधन से संबंधित संस्कार और अनुष्ठान करने के लिए हर की पौड़ी जाते हैं। कुछ तो अपने नवजात शिशुओं के पहले बाल गंगा को चढ़ाने भी आते हैं

गंगा आरती

प्रत्येक शाम सूर्यास्त के समय, हर की पौड़ी के पुजारी एक पुरानी परंपरा के अनुसार – गंगा आरती – करते हैं। गंगा आरती का गुणगान करने के लिए गंगा नदी के दोनों किनारों पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं। गंगा आरती के समय घाट पर स्थित मंदिरों में घंटियाँ बजाई जाती हैं और पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चार किया जाता है। लोग आशा और कामना के प्रतीक के रूप में दिये (पत्तियों और फूलों से बने) को गंगा नदी में प्रवाहित करते हैं। हालांकि, कुछ विशेष मामलों, जैसे ग्रहण की घटना पर, गंगा आरती का समय मुहूर्त अनुसार बदल दिया जाता है।

गंगा नहर में सूख रहा पानी

हर साल आम तौर पर दशहरा की रात को हरिद्वार में गंगा नहर में पानी आंशिक रूप से कम किया जाता है ताकि नदी के किनारे की सफाई और घाटों की मरम्मत का काम किया जा सके। आमतौर पर दिवाली की रात को पानी बहाल कर दिया जाता है। लेकिन गंगा आरती हमेशा की तरह हर दिन होती है। ऐसा माना जाता है कि दशहरा के दिन मां गंगा अपने पैतृक घर आती हैं और भाई दूज के दिन लौटती हैं।

हर की पौड़ी, हरिद्वार कैसे पहुंचे

हरिद्वार सभी हिंदुओं के लिए धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए एक बहुत ही पवित्र स्थान है। तो हरिद्वार न केवल भारतीय हिंदुओं को आकर्षित करता है, बल्कि यह दुनिया भर के हिंदुओं को भी आकर्षित करता है। भारत में हिंदू धर्म सीखने और देखने के लिए कई विदेशी यहां आते हैं।

इसलिए हरिद्वार वायुमार्ग, रेलवे और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। आप भारत में कहीं से भी हरिद्वार के लिए आसानी से ट्रेन प्राप्त कर सकते हैं। हर की पौड़ी हरिद्वार का मुख्य क्षेत्र है इसलिए यदि आप हरिद्वार में किसी से हर की पौड़ी का पता पूछेंगे तो कोई भी आसानी से आपका मार्गदर्शन कर सकता है। यह हरिद्वार में कृष्णा धाम, खरखरी के पास स्थित है।

हवाई मार्ग से: हरिद्वार में कोई राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा नहीं है। निकटतम राष्ट्रीय हवाई अड्डा देहरादून में जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है जो हरिद्वार से लगभग 45 किमी दूर है एवं निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा नई दिल्ली में है।

ट्रेन द्वारा: हरिद्वार रेलवे स्टेशन अच्छी तरह से विकसित है और भारत के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। हरिद्वार रेलवे स्टेशन से हर की पौड़ी की दूरी केवल 1 किमी है। हर की पौड़ी तक आप पैदल 10 मिनट में ही आसानी से पहुंच सकते हैं।

बस द्वारा: हरिद्वार नजदीकी शहरों और राज्यों से रोडवेज और निजी बसों द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। हरिद्वार ISBT बस स्टैंड से हर की पौड़ी की दूरी केवल 2 किमी है और आपको बस सीधी सड़क का अनुसरण करना है और आप हरि की पौड़ी पहुंचेंगे। आप स्थानीय रिक्शा, ई-रिक्शा, ऑटो आदि ले सकते हैं।

हर की पौड़ी के नज़दीक दर्शनीय स्थल

हर की पौड़ी के पास निम्न प्रसिद्ध मंदिर हैं –

  • गंगा माता मंदिर
  • मनसा देवी मंदिर
  • चंडी देवी मंदिर
  • श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर
  • माया देवी मंदिर
  • हरिचरण मंदिर
  • भारत माता मंदिर आदि।

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