गृह प्रवेश- कब और कैसे करें ?

गृह प्रवेश क्या है ?

गृह प्रवेश एक हिंदू अनुष्ठान है जिसमें शुभ मुहूर्त पर पूजा समारोह आयोजित किया जाता है, जब कोई व्यक्ति पहली बार एक नए घर में जाता है।

गृह प्रवेश एक हिंदू पूजा समारोह है, जिसे पर्यावरण को शुद्ध करने और घर को नकारात्मक ऊर्जा से बचाने के लिए पहली बार नए घर में प्रवेश करने के समय किया जाता है। “वास्तु के अनुसार” घर पांच तत्वों से मिलकर बना है- सूर्य, धरती, जल, अग्नि और वायु और इन सभी का सही तालमेल ही घर में खुशियां, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि लाता है।

ज्योतिष के अनुसार गृह प्रवेश तीन प्रकार का होता है:-

  1. अपूर्व गृह प्रवेश :- इसका अर्थ है पहली बार घर में प्रवेश करना।
  2. सपूर्व गृह प्रवेश:- इस का मतलब व्यक्ति पुराने खरीदे हुए घर में फिर से प्रवेश करता है।
  3. द्वान्धव गृहप्रवेश:- इसमें गृह प्रवेश उस घर में किया जाता है जिसका पुनर्निर्माण किया गया हो।

गृह प्रवेश कब करें ?

सबसे पहले गृह प्रवेश के लिए दिन, तिथि, वार एवं नक्षत्र को ध्यान मे रखते हुए, तिथि और समय का निर्धारण किया जाता है। गृह प्रवेश के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान जरूर रखें।

एक ब्राह्मण की सहायता से विधिपूर्वक मंत्रोच्चारण कर गृह प्रवेश की पूजा को संपूर्ण कर सकते हैं। घर के प्रवेश द्वार को सजाना और मंत्रों का जाप गृह प्रवेश पूजा विधि का एक अनिवार्य हिस्सा है।

शुभ तिथि

गृह प्रवेश हमेशा शुभ दिन पर करें। दशहरा और दिवाली गृह प्रवेश के लिए बहुत उपयुक्त माने जाते हैं। मुहूर्त के लिए वसंत पंचमी, अक्षय तृतीया, गुडी पड़वा और दशहरा जैसे दिन शुभ माने गए हैं। जबकि उत्रायण, होली, अधिकमास और श्राद्ध पक्ष अशुभ हैं।

माघ महीने में गृह प्रवेश करने पर धन का लाभ होता है। चैत्र मास में नए घर में प्रवेश करने पर धन का अपव्यय होता है। पुत्र की चाह हो तो व्यक्ति को ज्येष्ठ मास में गृह प्रवेश करना चाहिए।

जिस घर का द्वार दक्षिण दिशा में हो तो ग्रह प्रवेश एकम, छठ, ग्यारस आदि तिथियों में करना चाहिए। जिस घर का द्वार पश्चिम दिशा में हो तो गृह प्रवेश दूज और सप्तमी तिथि को करना श्रेष्ठ है।

पूजन सामग्री

कलश, नारियल, शुद्ध जल, कुमकुम, चावल, अबीर, गुलाल, धूपबत्ती, 5 शुभ मांगलिक वस्तुएं, आम या अशोक के पत्ते, पीली हल्दी, गुड, चावल, दूध इत्यादि।

अगर आप दशहरे पर नए घर में प्रवेश कर रहे हैं तो किसी शुभ समय की जरूरत नहीं है, क्योंकि इस पूरे दिन को शुभ माना गया है। गृह प्रवेश से पहले एक कलश पूजा भी होती है।

पूजा वाले दिन क्या करें ?

घर के प्रवेश द्वार को सजाएं। मुख्य द्वार को सजाया जाना चाहिए, क्योंकि इसे सिंह द्वार कहा जाता है और यह वास्तु पुरुष का चेहरा है। पूजा के दिन प्रवेश द्वार को फूलों और आम के ताजे पत्तों के तोरण से सजाऐं।

आप मुख्य द्वार पर स्वास्तिक चिन्ह या देवी लक्ष्मी के चरण भी लगा सकते हैं, ये समृद्धि के प्रतीक हैं। आप कोई और आध्यात्मिक चिन्ह भी लगा सकते हैं।

रंगोली धन और समृद्धि को आकर्षित करती है। फर्श को चावल के आटे या चमकीले रंगों से बनी रंगोली से सजाएं। माना जाता है कि फर्श पर रंगोली देवी लक्ष्मी को आमंत्रित करती है। बाजार में उपलब्ध चावल के आटे और रंगोली के रंगों का इस्तेमाल करके गृह प्रवेश पूजा करने से पहले प्रवेश द्वार के पास रंगोली बनाएं।

घर के लिए पहली चीज जो आपको खरीदनी चाहिए, वह है झाड़ू, घर को साफ़ करें पूजा शुरू करने से पहले अपने घर के हर कोने में पोछा लगाएं। पूरे घर में गंगाजल छिड़कें। घर के एक कोने में एक अलग कलश में गंगाजल रखें, इसके ऊपर कच्चे आम के पत्ते रखें। गंगाजल में एक शुद्ध ऊर्जा होती हैं जो घर से नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करती है।

गृहप्रवेश पूजा के लिए घर को रोशन करें। गृह प्रवेश के दिन पूरा घर और मुख्य द्वार अच्छी तरह से प्रकाशित हो । घर के किसी भी क्षेत्र में अंधेरा नहीं होना चाहिए।

नए घर में प्रवेश के समय घर के स्वामी को पांच मांगलिक वस्तुएं, नारियल, पीली हल्दी, गुड, चावल और दूध अपने साथ लेकर नए घर में प्रवेश करना चाहिए। भगवान गणेश की मूर्ति, दक्षिणावर्ती शंख, श्री यंत्र को भी गृह प्रवेश वाले दिन घर में ले जाना चाहिए।

ऐसा माना जाता है कि मिट्टी का दीपक जलाने से सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। घर में प्रवेश करते समय अपना दाहिना पैर पहले रखें।

गृह प्रवेश पूजा के लिए शुभ रंग वाले कपड़े पहनें और काले रंग से बचें।

हवन करना भी है अति आवश्यक

शांति और समृद्धि को आमंत्रित करने के लिए नए घर में हवन करना चाहिए। घर में नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करने और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने के लिए गणेश पूजा, वास्तु दोष पूजा और नवग्रह शांति पूजा के साथ हवन होना चाहिए।

पूजा के बाद सबसे पहले किचन की पूजा होती है। चूल्हे की पूजा करके गैस ऑन की जाती है, उसमें पानी देकर चावल और कुमकुम से स्वास्तिक बनाया जाता है, उसके बाद कुछ प्रसाद बनाकर पहले भगवान को और बाद में गरीबों को खिलाया जाता है।

रसोई घर में पहले दिन गुड व हरी सब्जियां रखना शुभ माना जाता है। चूल्हे को जलाकर सबसे पहले उसे पर दूध उफानना चाहिए। मिष्ठान बनाकर उसका भोग लगाना चाहिए। घर में बने भोजन से सबसे पहले भगवान को भोग लगाना चाहिए।

निर्माणाधीन घर में गृहप्रवेश से तब तक बचें, जब तक कि उसमें दरवाजे न लगें। खासकर मुख्य द्वार साथ ही घर की छत का पूरा निर्माण हो । गृह प्रवेश के बाद कोशिश करें कि अपने मुख्य दरवाजे को बंद न करें क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। ग्रह प्रवेश का समारोह छोटा हो या बड़ा यह पूरी तरह आप पर निर्भर करता है।

इसमें गणेश पूजा, नवगृह शांति, जिसमें 9 गृहों और वास्तु पूजा की जाती है। इस समारोह में आप पुजारी समेत जिन मित्रों या रिश्तेदारों को बुलाते हैं, उन्हें खाना खिलाया जाता है। गृह प्रवेश होने के बाद परिवार नए घर में रह सकता है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार गृह प्रवेश के बाद घर को खाली या फिर लॉक नहीं छोड़ना चाहिए। एक अन्य मान्यता के अनुसार, लोग अपने घरों के आंगन में अनार के पेड़ लगाते हैं। अनार को उर्वरता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए जो लोग अपना परिवार बढ़ाने की सोच रहे हैं, वे इस अनुष्ठान का पालन कर सकते हैं।

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