गणेश चतुर्थी: संपूर्ण जानकरी | Ganesh Chaturthi – also known as Vinayaka Chaturthi

Ganesh Chaturthi भारत के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल की चतुर्थी को मनाया जाता है । कहा जाता है कि गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी  में हुआ था । इसलिए यह चतुर्थी मुख्य गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी कहलाती है। यह कलंक चतुर्थी के नाम से भी जानी जाती है और कहीं-कहीं इसे डण्डा चौथ भी कहा जाता है।

गणेश चतुर्थी की कथा | Ganesh Chaturthi Katha

गणेश चतुर्थी को लेकर भारत मे कई कथायें प्रचलित है, लेकिन सबसे अधिक जो प्रसिद्ध है। उस कथा का उद्धरण शिव पुराण के अंतर्गत मिलता है।

एक बार की बात है। माता पार्वती स्नान करने के लिए जाती है। किंतु सारे द्वारपाल भगवान शिव के पास रहते है। इस लिए माता पार्वती अपने शरीर के मैल से एक बालक की प्रतिमा बनाती है और उसे जीवित करके आदेश देती है कि जब तक मै स्नान कर के नही आ जाती तब तक कोई प्रवेश न करे। आदेशानुसार वह बालक  भगवान शिव के आने पर उन्हे द्वार पर ही रोक देता है। बार बार भगवान शिव के आग्रह पर भी वह उन्हे जाने नही देता । इस बात पर भगवान शिव को गुस्सा आ जाता है और वह बालक का सर काट देते है। होहल्ला सुनकर माता पार्वती बाहर आती है। और भगवान शिव को उस बालक को ठीक करने को बोलती है।जिस पर भगवान शिव भगवान विष्णु को बोलते है कि कोई भी बालक जो अपनी माँ से दूर होकर सो रहा होगा , उसका सर काट कर लेते आइए। भगवान विष्णु भगवान शिव के अनुसार एक हाथी के बालक का सर काट कर ले आते है। और भगवान शिव गज बालक के सर को माता पार्वती के बनाए हुए बालक के धड़ से जोड़ देते है। तब माता पार्वती बहुत खुश होती है। और अन्य देवी देवता बालक का नाम गणेश रखते है और और अग्र पूज्य होने का आशीर्वाद देते है।

Ganesh Complete Information

गणेश चतुर्थी और चंद्रमा | Ganesh Chaturthi and Moon

शास्त्रो के अनुसार कहा जाता है कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को रात्रि में चन्द्र-दर्शन (चन्द्रमा देखने को) करने से झूठा-कलंक प्राप्त होता है।

              सिहः प्रसेनम्‌ अवधीत्‌, सिंहो जाम्बवता हतः।
              सुकुमारक
मा रोदीस्तव ह्येष स्वमन्तकः॥’

एक कथा के अनुसार एक बार ब्रह्माजी ने चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का व्रत किया। भगवान गणेश ने प्रकट होकर ब्रह्माजी के वरदानुसार ब्रह्माजी को सृष्टि रचना के मोह से मुक्त होने का वरदान दिया। भगवान गणेश जब जाने लगे तो चंद्रमा ने उनके रंग रूप का मजाक उड़ाया। चंद्रमा ने भगवान गणेश को लंबोदर और गजमुख कह कर उपहास उड़ाया। इस पर भगवान गणेश ने क्रोध में चंद्रमा को बदसूरत होने का श्राप देते हुए कहा जो भी चांद को देखेगा उस पर झूठा कलंक लगेगा। तब से गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन करना मना किया गया है।

Ganesh Chand Khani

गणेश चतुर्थी मे पूजा कैसे करें:

  1. इस दिन सुबह स्नान करने के बाद मिट्टी की गणेश प्रतिमा लें।
  2. एक कलश लें और उसमें जल भरकर उसके मुंह पर कोरा वस्त्र बांधकर उसके ऊपर गणेश जी को विराजमान करें।
  3. गणेश जी को सिंदूर व दूर्वा अर्पित करके लडडुओं का भोग लगाएं. , इनमें से कुछ लड्डू गरीबों या ब्राह्मणों को बाँट दें।
  4. शाम के समय गणेश चतुर्थी की कथा, गणेश चालीसा और आरती पढ़ने के बाद अपनी दृष्टि को नीचे रखते हुए चन्द्रमा को अर्घ्य देना चाहिए।

गणेश चतुर्थी का महत्व

इस दिन गणेश जी के सिद्धिविनायक रूप की पूजा व व्रत किया जाता है।इस दिन पूजा करने से भगवान गणेश सभी विघ्न को दूर कर सभी मनोकामना पूर्ण करते है।

गणेश चतुर्थी का महत्व
Ganesh Chaturthi

महाराष्ट्र मे गणेश पूजन बहुत ही धूमधाम से होता है। यह पूजा दस दिन तक चलती है। भारतीय हिन्दु धर्म मे भगवान गणेश की पूजा महत्वपूर्ण मानी गई है। कोई भी शुभ कार्य हो अथवा कोई भी पूजा सभी मे भगवान गणेश को सर्वप्रथम याद किया जाता है। इसका प्रमाण हमे प्राचीन काल के स्थापत्य कला और मूर्तिकला मे स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है।

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