दशहरा | Dussehra (विजयादशमी व आयुध पूजा): संपूर्ण जानकारी

Dussehra (विजयादशमी व आयुध पूजा) शरद मास के दशमी दिन मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण पर  विजय प्राप्त की थी। इस दिन रावण का पुतला बनाकर पटाखो से जलाया जाता है जो असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है।

दशहरा (विजयादशमी व आयुध पूजा) की कथा | Story behind Dussehra

1• भगवान श्री राम की रावण विजय: शरद मास के दशमी दिन भगवान श्रीराम और रावण के बीच अंतिम युद्ध हुआ था। इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध करके लंका विभीषण को सौंप कर माता सीता को लेकर अयोध्या वापस आये थे। अयोध्या वासी ने इस खुशी मे अयोध्या को पूरे दीपो से सजाया। तब से शरद मास के दशमी दिन रावण का पुतला दहन कर के मिठाईयाँ बांटी और खाई जाती है।

2• माँ दुर्गा द्वारा राक्षस महिषासुर का वध: प्राचीन ग्रंथ मे उल्लेख किया गया है जब  पृथ्वी पर राक्षस महिषासुर का अत्याचार बढ़ गया। जब  सभी देव देवता ॠषि मुनि परेशान हो गये तो सभी ने मिलकर माँ दुर्गा का आव्हान किया ।तब माँ दुर्गा ने अवतार लिया और राक्षस महिषासुर से नौ दिन तक युद्ध किया। शरद मास के दिन माँ दुर्गा ने नौ दिन से चल रहे युद्ध को राक्षस महिषासुर के वध के साथ समाप्त किया था। इस दिन पृथ्वी पर नए जीवन का संचार फिर से आरंभ हुआ। इसलिए दुर्गापूजा मे पूजा करने से जीवन मे सकारात्मकता आती है।

भारत के विभिन्न प्रदेशो मे दशहरा:

मैसूर कर्नाटक के मैसूर प्रांत मे दशहरे के दिन मैसूर महल  रात भर रोशनी से जगमगाता रहता है और हाथियो को भी सजाया जाता है। और साथ मे यहाँ के स्थानीय लोग टार्च लाइट मे डांस भी करते है।

आंध्र प्रदेश- आंध्र प्रदेश मे दशहरे के दिन पूजा-पाठ कर के कोई नया कार्य प्रारंभ करते है। साथ ही इस दिन मिठाईयाँ भी खाई और बांटी जाती है।

उत्तर प्रदेश (अयोध्या)- अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्म भूमि है। जब भगवान श्रीराम दुष्ट राक्षस रावण का वध करके माता सीता के साथ वनवास से जब वापस लौटे तो इस की खुशी मे अयोध्या मे दीपोत्सव मनाया था। तब से यहाँ दशहरे का त्यौहार धूमधाम से मनाते है। इस दिन रावण का पुतला दहन कर के मिठाईयाँ बांटी और खाई जाती है।

हिमाचल प्रदेश– पूरे भारतवर्ष मे हिमाचल प्रदेश के कुल्लू प्रांत का दशहरा बहुत ही मशहूर व प्रसिद्ध है। इस त्यौहार की तैयारी यहाँ एक हफ्ते पूर्व से आरंभ हो जाती है। इस दिन झांकी निकाली जाती है। और रावण का पुतला जलाकर नृत्य किया जाता है। यहाँ मेला भी लगता है।

पंजाब- पंजाब मे भी दशहरा बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है यहाँ पर भी रावण का पुतला जलाकर भगवान श्रीराम के नारे लगाए जाते है और फिर मिठाईयाँ खाई और बांटी जाती है। साथ मे नौ दिन तक रामलीला का भी आयोजन होता है।

पश्चिम बंगाल- पश्चिम बंगाल मे दशहरा को नवरात्र के दशमी के रूप मे मनाते है। इस दिन माँ दुर्गा की पूजा अर्चना कर के विवाहिता स्त्री एक दूसरे को माँ दुर्गा के सामने सिंदूर लगाती है और मिठाईयाँ खिलाती है। उसके बाद माँ दुर्गा को विदाई दी जाती है। माँ दुर्गा का विसर्जन हर्षोल्लास के साथ किया जाता है और पुनः आने का निमंत्रण दिया जाता है।माँ दुर्गा के विसर्जन होने का दृश्य अद्वितीय होता है।

महाराष्ट्र- महाराष्ट्र मे दशहरे वाले दिन को दशमी के रूप मे मनाते है।इस दिन माँ सरस्वती की पूजा की जाती है। महाराष्ट्र मे इस दिन विधा का शुभारंभ किया जाता है। साथ ही साथ इस दिन भवन खरीदना, विवाह करना जैसे काम भी किये जाते है।महाराष्ट्र मे नवरात्र के दशमी और दशहरा को बहुत ही शुभ मानते है।

गुजरात- गुजरात मे इस दिन महिलाऐ सुंदर सजा हुआ घड़ा अपने सर पर रखकर नृत्य करती है। इसे ही गरबा नृत्य कहा जाता है। और कहीं कहीं स्त्री पुरुष डंडे के साथ नृत्य करते है इसे डांडिया नृत्य कहा जाता है।यह दोनो नृत्य रात भर माँ दुर्गा के प्रतिमा के सामने किया जाता है।

दशहरा पर्व का महत्व | Importance of Dussehra

Dussehra को विजयोत्सव दिन भी कहा जा सकता है। प्राचीन ग्रंथो मे उल्लेख मिलता है कि इस दिन आश्विन शुक्ल के दशमी अर्थात दशहरे वाले दिन विजय नामक मुहूर्त होता है जिसमे कोई भी कार्य करने से विजय प्राप्त होती है।

दशहरा के पर्व मे यह  संदेश मिलता है की बुराई कितनी भी शक्तीशाली हो उसका अंत तय होता है। अंत मे सदैव अच्छाई ही जितती है।

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