धरणीधर जंयती (भगवान जयंती) | Dharnidhar Bhagwan Jayanti

Dharnidhar Bhagwan विष्णु के शेषनाग अवतार का नाम है। शास्त्रो के अनुसार धरणीधर का अर्थ है शेषनाग सर्प जिसने पूरी पृथ्वी को अपने सर पर उठा रखा है। यह जंयती मुख्य रूप से भारत के राजस्थान राज्य मे मनाई जाती है। यह जंयती मुख्य रूप से धाकड़ समाज मनाता है।

धाकड़ समाज क्या है? | Dhakad Samajh

धाकड़ समाज स्वयं को मथुरा नरेश महाराज सुरसेन के पुत्र वासुदेव का वंशज मानते है। इनके अनुसार वासुदेव और वासुदेव की प्रथम पत्नी रोहिणी ने श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भाई बलराम को जन्म दिया था। शास्त्रों के अनुसार बलराम ने हल को शस्त्र की तरह प्रयोग किया था।चूँकि धाकड़ समाज भी खेतिहर समाज है इसलिए धाकड़ समाज (भगवान बलराम )भगवान धरणीधर को अपना आराध्य देव मानता है।

धरणीधर भगवान की पुजा | Pooja of Dharnidhar Bhagwan

धरणीधर भगवान का प्रसिद्ध मंदिर मान्डूकला (राजस्थान) मे सुंदर तालाब के किनारे शोभमान है। इस दिन महिलायें सर पर कलश रखकर घर से मंदिर की ओर पैदल प्रस्थान करती है।इस दिन जुलूस और झांकी भी निकाली जाती है। धाकड़ समाज के लिए यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण त्यौहार है।

धरणीधर भगवान की पूजा का महत्व | Importance of Dharnidhar Bhagwan

धरणीधर भगवान मुख्यतः कृषि के भगवान माने जाते है। कहा जाता है कि भगवान बलराम जो भगवान विष्णु के शेषनाग अवतार माने जाते है , पेशे से खेती करते थे।मान्यता है कि इस भगवान की पूजा से खेत की फसल अच्छी होती है।

धरणीधर भगवान की पूजा कब होती है?

धरणीधर भगवान की पूजा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मोत्सव (जन्माष्टमी) से कुछ दिन पहले होती है।

भगवान् धरणीधर जयंती कब मनाई जाती है ?

भगवान धरणीधर जयंती प्रतिवर्ष भाद्रपद माह कृष्ण पक्ष की षष्टी तिथि को मनाया जाता है ।

धरणीधर जयंती 2022 | Dharnidhar Jayanti 2022

धरणीधर जयंती इस वर्ष 17 अगस्त 2022 बुधवार के दिन है।

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