धनतेरस:धन की वर्षा | Dhanteras: A day for God of Wealth

Dhanteras- हिन्दु धर्म के पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण की त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि का जन्म समुद्र मंथन से हुआ था। कार्तिक कृष्ण की त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि का जन्म दिन के रूप मे मनाया जाता है। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का देवता भी मानते है। इस लिए इस दिन  को भारत सरकार राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप मे मनाता है।

धनतेरस मे पूजा कैसे करे। Pooja of Dhanteras

धनतेरस के दिन सोना चांदी खरीदने का रिवाज है। इस दिन बर्तन अवश्य खरीदने चाहिए। कहा जाता है कि समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि हाथ मे अमृत कलश लेकर निकले थे इसलिए इस दिन बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।

धनतेरस की संध्या मे यमदेव को दीप दान किया जाता है ताकि उपासक और उसका परिवार मृत्यु के देवता यमराज के प्रकोप से बचे रहे। एक कथा के अनुसार हेम नामक राजा को पुत्र की प्राप्ति हुई लेकिन उसकी कुंडली मे लिखा था जिस दिन इसका विवाह होगा उसके चार दिन बाद उसकी मौत हो जाएगी। लेकिन राजकुमार ने एक स्त्री से चुपचाप गंधर्व विवाह कर लिया और उस विवाह के चौथे दिन भगवान यमराज राजकुमार के प्राण हरने के लिए आये तब राजकुमार की पत्नी बहुत रोयी इस पर यमराज के एक यम ने पूछा हे यमराज! क्या कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे मनुष्य अकाल मृत्यु से मुक्त हो जाए। तब यमराज ने कहा कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात को जो प्राणी मेरे नाम से पूजन करके दीपमाला दक्षिण दिशा की ओर भेट करेगा है, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा तभी से इस दिन शाम को दक्षिण दिशा की ओर दिया जलाया जाता है।

धनतेरस के दिन क्या करें?

  1. इस दिन चांदी सोना खरीदना बहुत शुभ माना जाता है।
  2. इस दिन विशेष रूप से बर्तन खरीदने चाहिए।
  3. इस दिन दक्षिण दिशा की ओर दिया जलाना चाहिए।
  4. नया झाड़ू खरीदकर उस की पूजा करनी चाहिए।
  5. इस दिन लक्ष्मी गणेश भगवान के पूजा के साथ-साथ कुबेर भगवान का भी पूजन करना चाहिए।

धनतेरस के दिन क्या नही करे?

  1. धनतेरस के दिन कांच का सामान नही खरीदना चाहिए क्योंकि कांच का संबंध राहु ग्रह से माना जाता है।
  2. धनतेरस के दिन काले रंग का सामान नही खरीदना चाहिए क्योंकि काला रंग दुर्भाग्य का प्रतीक है।
  3. इस दिन लोहे का भी सामान नही खरीदना चाहिए।

धनतेरस की पूजा करने का मंत्र

यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये,

धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।

धनतेरस की पूजा करने की विधि

  • धनतेरस की पूजा करते समय सबसे पहले एक चौकी लें और फिर उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछा दें। 
  • उसके बाद गंगाजल लेकर माता महालक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि,और भगवान कुबेर की फोटो व मूर्ति पर छिड़के और उसके बाद फोटो व मूर्ति को चौकी पर स्थापित करें। 
  • तीनो देवी देवताओ के सामने धूप, देसी घी युक्त दीपक, और अगरबत्ती जलाएं। 
  • इसके बाद माता महालक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि,और भगवान कुबेर की फोटो व मूर्ति पर लाल रंग के फूल विशेष करके चढावे ।
  • इसके बाद आपने इस दिन जो भी कुछ खरीदा हो जैसे बर्तन, कोई धातु या फिर ज्वेलरी (सोना चांदी) उसे माता महालक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि,और भगवान कुबेर की फोटो व मूर्ति के सामने चौकी पर रख दें।
  • इसके बाद लक्ष्मी चालीसा, लक्ष्मी स्तोत्र, लक्ष्मी यंत्र, के साथ-साथ कुबेर स्तोत्र और कुबेर यंत्र का भी पाठ करें और तीनो देवी देवताओ (माता महालक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि, और भगवान कुबेर) को भोग चढाए। इस दिन बताशा और चावल से बनी खीर का भोग लगाया जाता है।
  • धनतेरस की पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद अवश्य बांटे।और ग्रहण करें।

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