भारत के चार धाम | Char Dham : Importance behind it

भारत के चार धाम बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी और रामेश्वरम है। आदि शंकराचार्य ने हिन्दु धर्म मे धार्मिक दृष्टिकोण से इन Char Dham की यात्रा को जरूरी माना है। प्राचीन ग्रंथो मे भी यही लिखा हुआ है कि मनुष्य को अपने जीवनकाल मे एक बार चार धाम की यात्रा जरूर करनी चाहिए। यह यात्रा मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करता है।

चार धाम यात्रा का महत्व | Importance of Char Dham

प्राचीन ग्रंथो एवं स्कंदपुराण मे उल्लेख है कि जो भी व्यक्ति चार धाम की यात्रा अपने जीवनकाल मे एक बार भी करेगा तो उसे मानसिक और शारीरिक रूप से आत्मसंतुष्टि और आत्म संयम के साथ मोक्ष की प्राप्ति होगी। आदि शंकराचार्य के अनुसार चारो धाम की यात्रा से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते है और उसमे नयी सकरात्मक ऊर्जा का संचार होता है।यही नही चारो धाम की यात्रा से व्यक्ति के मृत्यु के बाद शरीर पंचतत्व मे विलीन होकर भगवान विष्णु के शरण मे चला जाता है।

चार धाम यात्रा का महत्वपूर्ण तथ्य | Facts of Char Dham

चार धाम की यात्रा समाप्त एवं सफल तभी मानी जाती है जब  भगवान शिव और भगवान विष्णु के दर्शन साथ मे किये जाते है। पुरी मे भगवान जगन्नाथ (भगवान विष्णु का एक रूप) के दर्शन के बाद भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर का दर्शन अवश्य करना चाहिए। इसी प्रकार द्वारिका मे  द्वारिकानाथ (भगवान विष्णु का एक रूप) के दर्शन के बाद सोमनाथ मंदिर मे भगवान शिव का दर्शन अवश्य करना चाहिए। इसी प्रकार रामेश्वरम मे भगवान शिव के दर्शन के बाद भगवान रंगनाथ स्वामी (भगवान विष्णु का प्रतिरूप) के दर्शन अवश्य करने चाहिए। और अंत मे बद्रीनाथ मे स्थापित भगवान विष्णु के दर्शन के बाद केदारनाथ मे स्थापित भगवान शिव के दर्शन अवश्य करने चाहिए। स्कंदपुराण मे उल्लेख है कि भगवान शिव- भगवान विष्णु के मेल मे दर्शन करने से ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है क्योकि भगवान विष्णु अगर सृष्टि को सुचारु रुप से चलाते है तो भगवान शिव सृष्टि के सुचारु रूप से चलने मे आने वाली बाधाओ को नष्ट करते है।दोनो ही एक दूसरे के पूरक है इसलिए मोक्ष प्राप्ति के लिए दोनो का दर्शन आवश्यक है।

चार धाम की यात्रा कब करे? | Char Dham Yatra Timing

चूँकि चार धाम  दिशा एवं भारत के मानचित्र के हिसाब से चार दिशा और चार कोनो मे स्थापित है इसलिए चारो धाम की यात्रा का उचित समय भी अलग- अलग है।

  1. बद्रीनाथ- केदारनाथ धाम की यात्रा: 
    बद्रीनाथ- केदारनाथ धाम भौगोलिक दृष्टिकोण से काफी ऊँचाई पर स्थित है।यह भारत के उत्तरी दिशा की ओर है।यहाँ ठंड के दिनो मे कड़ाके की ठंड पड़ती है और बर्फ भी गिरती है। कभी- कभी भारी बर्फ़बारी से मंदिर भी ढक जाता है।इस लिए बद्रीनाथ- केदारनाथ धाम की यात्रा का उचित समय अप्रैल माह के अंत से नवंबर माह के प्रथम सप्ताह तक अच्छा रहता है।
  2. रामेश्वरम:
    रामेश्वरम भारत के दक्षिणी दिशा की ओर है।यहाँ गर्मी के मौसम मे बहुत गर्मी पड़ती है यहाँ गर्मियो के दिन मे तापमान 40°तक चला जाता है। इस लिए रामेश्वरम और रंगनाथ स्वामी का दर्शन अक्टूबर माह से मार्च माह मे किया जा सकता है। इस समय मौसम न ज्यादा गर्म और न ही ज्यादा ठंडा होता है।
  3. द्वारिका -सोमनाथ:
    द्वारिकाधीश और भगवान सोमनाथ (भगवान शिव का रूप) का मंदिर भारत के गुजरात राज्य मे है। यह भारत के पश्चिम दिशा की ओर है। द्वारिका एवं सोमनाथ मंदिर का दर्शन बारिश के महीनो ( जून माह के अंतिम सप्ताह से सितंबर माह के प्रथम सप्ताह तक) को छोड़कर किसी भी माह मे किया जा सकता है।
  4. पुरी-लिंगराज:
    भगवान जगन्नाथ और भगवान लिंगराज  का मंदिर भारत के  दक्षिण- पूर्व दिशा मे है। भगवान जगन्नाथ और भगवान लिंगराज का दर्शन किसी भी महीने मे किया जा सकता है।

चारो धाम अपने निकटवर्ती राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े हुए है। साथ ही साथ निकटवर्ती वायुअड्डा से भी। इस लिए  चारो धाम की यात्रा आसानी से की जा सकती है।

नोट: केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री भारत के उत्तराखंड राज्य के चार धाम है।

अंत मे मनुष्य को आत्मा की शांति और सुकून के लिए चार धाम की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। कहते है चार धाम की यात्रा से मनुष्य योनि सफल होती है। मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसे बैंकुठ मे स्थान मिलता है।

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