झीलो का शहर: भोपाल | Bhopal: City of Lakes

भोपाल मध्य प्रदेश राज्य की राजधानी है। यह नगरी राजा भोज के द्वारा बनाई गई इस लिए इसका नाम भोपाल पड़ा। इसे मुख्य रूप से भोपाल गैस त्रासदी के कारण भी जाना जाता है। यह नगरी चारो तरफ से पर्वत और झीलो से घिरी हुई है। इसलिए इसे झीलो का शहर भी कहते है। भोपाल को नवाबो का शहर भी कहा जाता है।

यहाँ कई झीले है। कहते है भोपाल मे प्राचीन समय मे बहुत झीले थी जो अब सिर्फ कुछ ही रह गयी है।

ये झीले है-

बड़ा तालाब Bhopal

बड़ा तालाब राजा भोज के द्वारा बनाया गया था। इंग्लिश मे इसे अपर लेक भी कहते है। कहते है जब राजा भोज को चर्म रोग हुआ तो एक संत ने उन्हे 365 स्त्रोत से बने जलाशय मे स्नान कर ने को बोले लेकिन राजा भोज को निराशा मिली जब बेतवा नदी के मुहाने पर केवल 356 सरिताओ का ही पानी मिला तब गोंड के मुखिया ने दूसरी सहायक नदियो के बारे मे बताया। और इस तरह मिलाकर 365 स्त्रोतो से मिलकर यह जलाशय बना। अभी भी इस तालाब से भोपाल के निवासियो को पानी मुहैया करवाया जाता है।यह एशिया मे सबसे बड़ी मानव निर्मित कृत्रिम झील  है।

छोटा तालाब Bhopal

यह तालाब भी बड़े तालाब के पास ही है। कहते है कि रानी कमलापति अपनी इज्ज़त मोहम्मद खान से बचाने के लिए इसी तालाब मे कूदकर जान दे दी थी इस लिए इसे कमलापति तालाब भी बोलते है। यह तालाब अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है।

शाहपुर झील, भोपाल

शाहपुर झील का निर्माण भी नवाबो ने किया था। यह झील भी भोपाल के अन्य झीलो के समान सुंदर है। पर्यटक यहाँ बोटिंग का भी मजा ले सकते है।

मोतिया तालाब, भोपाल

मोतिया तालाब का निर्माण नवाब शाहजहाँ बेगम ने किया था। कहते है उन्होने तीन सीढ़ी तालाब का निर्माण करवाया था। इनमें पहली सीढ़ी पर मोतिया, दूसरी पर नवाब सिद्दीक हसन और तीसरी सीढ़ी पर मुंशी हुसैन खां तालाब है।यहाँ से मोती मस्जिद दिखायी देती है।

नवाब सिद्दीकी हसन खान तालाब, भोपाल

इस तालाब का निर्माण भी नवाब शाहजहाँ बेगम ने किया था। यह तालाब की दूसरी सीढ़ी बोली जाती है।

मुंशी हुसैन खान तालाब, भोपाल

इस तालाब का निर्माण भी नवाब शाहजहाँ बेगम ने किया था। यह तालाब की तीसरी सीढ़ी बोली जाती है।

इस के अतिरिक्त यहाँ लेंडिया तालाब, शरणगेरिया झील जवाहर बाल उद्यान झील, मुंशी हुसैन खान तालाब मन्नित झील, मुल्ला सरोवर जैसी कई झील और तालाब है।

भोपाल नवाबो का शहर कहलाता है। यहाँ के परिवेश मे नवाबी झलक देखने को मिलती है। भोपाल के नामकरण पर कई तरह के किस्से है।कोई कहता है कि राजा भोज के नाम पर इस नगर का नाम भोपाल पड़ा है। तो कोई बोलता है भोपाल दो शब्द भू जिसका अर्थ भूमि से है। और दूसरा शब्द पाल जिसका अर्थ दूध से है। तो कोई इस का नाम राजा भूपाल शाह के नाम से भी जोड़ते है।

भोपाल का राष्ट्रीय राजमार्ग देश के अन्य सभी मार्ग से जुड़ा हुआ है। भोपाल का रेल मार्ग भी देश के अन्य प्रांत से जुड़ा हुआ है।भोपाल का हवाई मार्ग भी देश के अन्य प्रांत से जुड़ा हुआ है। इसीलिए यहाँ आसानी से आया-जाया सकता है।

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