Bhojpur Shiv Temple | भोजपुर शिव मंदिर – “Somnath of North India”

Bhojpur का Shiv Mandir मध्य प्रदेश राज्य की राजधानी भोपाल से 30 किमी दूर भोजपुर नामक गांव मे स्थित है। यह मंदिर विंध्य की पहाड़ियो से घिरा हुआ है और बेतवा नदी के तट पर स्थित है। इस मंदिर को “उत्तर भारत का सोमनाथ” भी कहते है। भोजपुर के शिव मंदिर को भोजेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

भोजपुर शिव मंदिर का निर्माण | Bhojpur Shiv Mandir

इस मंदिर के बारे मे एक कथा प्रचलित है कि पांचो पांडव माता कुंती के शिव आराधना के लिए इस मंदिर का निर्माण किया। किंतु  इतिहासकारो का मानना है कि  इस मंदिर का निर्माण मध्य-भारत के परमार वंशीय राजा भोजदेव ने 11वीं शताब्दी में करवाया था।यह मन्दिर मूलतः  18॰5 मील लम्बे एवं 8॰5 मील चौड़े सरोवर के तट पर बना हुआ है। मन्दिर निर्माण में भोजपुर क्षेत्र के ही पथरीले पत्थर का प्रयोग  किया गया है।

भोजपुर शिव मंदिर का स्थापत्य कला | Architecture of Bhojpur Temple

भोजपुर मन्दिर में बहुत से आश्चर्यजनक घटक देखने को भी मिलते हैं जैसे : गर्भगृह प्रभाग से मण्डप का विलोपन, मन्दिर में गुम्बदाकार शिखर के बजाय सीधी रेखीय छत आदि। मन्दिर की बाहरी दीवारों में से तीन बाहरी ओर से एकदम सपाट हैं। इतिहासकारो का मानना है कि शायद यह मंदिर अंत्येष्टि कार्यो के लिए भी प्रयुक्त होता होगा।मन्दिर की इमारत पर 1300 से अधिक शिल्पकारों के पहचान चिह्न मिले हैं। इनमें से कुछ के नाम मन्दिर के मुख्य ढांचे पर विभिन्न भागों पर मिले है।इन नामों के अलावा अन्य पहचान चिह्न भी हैं, जैसे चक्र, त्रिशूल, कटे हुए चक्र, शंखाकृति, पहिये, स्वस्तिक और नागरी लिपि के चिह्न, आदि।

भोजपुर शिव मंदिर अधूरा मंदिर | Incomplete Bhojpur Temple

भोजपुर का शिव मंदिर अधूरा मंदिर है। कुछ कारणो से इस मंदिर का निर्माण कार्य अधूरा ही रह गया है। इतिहासकारो का मानना है कि संभवतः निर्माण काल में पूरे भार के सही आकलन में गणितीय वास्तु दोष के कारण मंदिर की छत निर्माण-काल में ही ढह गयी होगी। तब राजा भोज ने इस दोष के कारण मन्दिर के निर्माण को ही रोक दिया होगा। या फिर कोई ऐसी प्राकृतिक आपदा व संसाधनों की आपूर्ति में कमी अथवा किसी युद्ध के आरम्भ हो जाने के कारण ही यह मंदिर अधूरा रह हो गया होगा।

एक कथा यह भी है कि पांडवो को इस मंदिर का निर्माण कार्य करते हुए सुबह हो गई जिस से निर्माण कार्य पूरा नही हो पाया और छत नही बन पाया फलस्वरूप मंदिर अधूरा रह गया क्योंकि मंदिर को एक ही रात मे बनाना था।

भोजपुर शिव मंदिर की खासियत (विशेषताऐ)

  • भोजपुर के शिव मंदिर का शिवलिंग विश्व का सब से बड़ा शिवलिंग है।शिवलिंग  की ऊँचाई लगभग 7.5 फुट लम्बा और 17.8 फुट परिधि वाला है।
  • भोजपुर के शिव मंदिर का शिवलिंग एक ही पत्थर के चट्टान से बनाया गया है।इस शिवलिंग मे कही भी जोड़ नही है।
  • भोजपुर के शिव मंदिर का निर्माण एक ही रात मे हुआ है।
  • विशालकाय शिवलिंग होने के कारण शिवलिंग की पूजा जलहरी पर चढ़कर किया जाता है। पुजारी दिन में दो बार जलहरी पर चढ़कर भगवान का अभिषेक और पूजा करते है।
  • भोजेश्वर मंदिर के पीछे के भाग में बना हुआ एक ढलान है, जिसका उपयोग संभवतः मंदिर के निर्माण कार्य मे विशाल पत्थरों को ढोने के लिए किया जाता होगा पूरे दुनियाभर में कहीं भी ऐसे अवयवों को संरचना के ऊपर तक पहुंचाने के लिए ऐसी प्राचीन भव्य निर्माण तकनीक उपलब्ध नहीं है।
  • भोजपुर के शिव मंदिर मे वर्ष में दो बार वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है जो मकर संक्रांति व महाशिवरात्रि पर्व के समय होता है। इस  उत्सव में प्रतिभाग लेने के लिए दूर दूर से लोग यहां पहुंचते हैं।

भोजपुर शिव मंदिर कैसे पहुँचे | How to reach Bhojpur Temple

भोजपुर का शिव मंदिर आसानी से पहुंचा जा सकता है।यह मंदिर भोपाल से लगभग 30 किमी की दूरी पर स्थित है।

वायु मार्गभोजपुर से केवल 28 किमी की दूरी पर भोपाल का राजा भोज विमानक्षेत्र यहाँ के लिये निकटतम हवाई अड्डा है।  यहाँ से दिल्ली,कलकत्ता, मुंबई, इंदौर और प्रमुख शहरो के लिए उड़ानें उपलब्ध हैं।

रेल मार्ग भोपाल एवं हबीबगंज भोजपुर शिव मंदिर पहुंचने का सबसे निकटतम  रेलवे स्टेशन हैं।

सड़क मार्ग- भोपाल देश के राष्ट्रीय राजमार्ग NH 46 देश के सभी भागो से जुड़ा हुआ है।भोजपुर के लिए भोपाल से कई बसें मिल जाती हैं।

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