बगलामुखी माता मंदिर, नलखेडा मध्यप्रदेश 

माता बगलामुखी मंदिर मध्यप्रदेश के आगर-मालवा जिले की नलखेड़ा तहसील में लखुंदर नदी के तट पर स्थित एक ऐसा मंदिर हैं जहां शक्ति के दर्शन किये जाते हैं। माता बगलामुखी के मंदिर में आने से न केवल भक्तों के कष्ट दूर होते हैं बल्कि उसके शत्रुओं का भी नाश होता है। माता के दरबार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। जहां आम आगंतुक अपनी इच्छाएं लेकर आते हैं, वहीं राजनेता-अभिनेता और अन्य हस्तियां चुनाव जीतने, मुकदमेबाजी और महत्वपूर्ण मुद्दों में सफलता प्राप्त करने की कामना लेकर आते हैं।

बगलामुखी माता मंदिर निर्माण का इतिहास

बहुत कम लोग जानते हैं कि महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने कौरवों के खिलाफ युद्ध में जीत के लिए पांडवों को पूजा करने का आदेश दिया था। जिसके बाद पांडवों ने यहां तपस्या की, जिसके परिणामस्वरूप देवी शक्ति यहां प्रकट हुईं। माता ने पांडवों को कौरवों पर विजय प्राप्त करने का वरदान दिया था। पांडवों के बड़े भाई धर्मराज युधिष्ठिर ने मां का आशीर्वाद पाकर यहां मंदिर का निर्माण कराया था। यह भी माना जाता है कि माता बगलामुखी की मूर्ति स्वयंभू है। कहा जाता है कि 1816 ईस्वी में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया था।

माता बगलामुखी के अलावा माता लक्ष्मी, सरस्वती, देवी चामुंडा, भगवान कृष्ण, श्री हनुमान, श्रीकाल भैरव और शिव परिवार विराजमान हैं। प्राचीन तंत्र ग्रंथों में दस महाविद्याओं का उल्लेख मिलता है, उन्हीं में से एक है बगलामुखी।

सभी देवी देवताओं में मां भगवती बगलामुखी का महत्व सबसे विशेष है। भारत में मां बगलामुखी के तीन ही प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर माने जाते है, जो क्रमशः दतिया (मध्यप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचलप्रदेश) और नलखेड़ा जिला आगर (मध्यप्रदेश) में हैं। तीनों का अपना महत्व है।

माता बगलामुखी की पूजा विधि

माता बगलामुखी की पूजा आम लोग भी करते हैं, लेकिन माता की विशेष पूजा तांत्रिक विधि से होती है। जिसके लिए विधि-विधान से पूजा करना जरूरी है। पीले रंग से मां प्रसन्न होती हैं। बगलामुखी के उपासक विशेष रूप से पीले रंग के वस्त्र धारण करते हैं। मां की पूजा में पीले फूल, पीली मिठाई और पीले रंग का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा श्रद्धालु पीले रंग की पूजा सामग्री चुनरी, मिठाई आदि भी चढ़ाते हैं। मां बगलामुखी को शत्रु ठहराव और शत्रु विनाश की देवी माना जाता है। हल्दी की गांठों की माला से भी माता की पूजा की जाती है। माता पीले वस्त्र धारण करती हैं, इसलिए इन्हें पीताम्बरा माता भी कहा जाता है।

बगलामुखी नाम के पीछे की वजह

मां को यह नाम उनके चेहरे की वजह से मिला है। माँ का मुख निराला है। मां बगुले के मुंह के समान हैं और भक्तों को निर्भयता प्रदान करती हैं। यहां देश-विदेश से साधु-संत, तांत्रिक समेत देश-विदेश से कई श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते रहते हैं।

मां बगलामुखी का बीज मंत्र

कई जगहों पर मां बगलामुखी का बीज मंत्र सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला पाया जाता है और अगर कोई अशुद्ध मंत्र का उच्चारण या जप करता है तो उसे भारी नुकसान हो सकता है। मंत्र के जानकारों का कहना है कि अगर इस मंत्र का सही उच्चारण किया जाए तो मां बगलामुखी का यह बीज मंत्र साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी कर सकता है।

इस मंत्र के शुद्ध और भावपूर्ण उच्चारण से शत्रु शांत हो सकता है, मुकदमा जीत सकता है, आध्यात्मिक समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है, बंधनों से मुक्ति मिल सकती है, जैसे कि कोई निर्दोष व्यक्ति जेल में है या जेल जाने वाला है। इस मंत्र के अभ्यास से 100% बचाव किया जा सकता है। भूत-प्रेत और जादू-टोने की बाधा से रक्षा होती है, सारे भय खत्म हो जाते हैं, धन संबंधित परेशानी दूर होती है। इस साधना से कोई भी व्यक्ति अपने व्यक्तित्व को प्रभावशाली बना सकता है।

शुद्ध बगलामुखी बीज मंत्र

ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्व दुष्टानाम वाचं मुखम पदम् स्तम्भय।
जिव्हां कीलय बुद्धिम विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा ।।

बगलामुखी मंत्र के प्रारंभ में ह्रीं या ह्ली बीजों का प्रयोग किया जा सकता है, जब आपका धन किसी शत्रु द्वारा हड़प लिया गया हो तब ह्रीं लगाएं और ह्ली का प्रयोग शत्रु को पूरी तरह से परास्त करने के लिए ही करें। इससे शत्रु को वश में करने की अद्भुत शक्ति मिलती है, लेकिन यह सब एक-दो दिन में नहीं होगा, बल्कि इसके लिए संकल्प लेकर कम से कम 40 दिनों तक विशेष अनुष्ठान करने का विधान है। बिना नियम जाने इस अभ्यास को नहीं करना चाहिए। नहीं तो आप समस्या से निजात नहीं पा सकेंगे। माँ बगलामुखी अपने भक्त से भक्ति और विश्वास चाहती हैं, यदि आप पूर्ण विश्वास रखते हैं और नियम से साधना करते हैं तो आपको सफलता अवश्य मिलेगी।

दुश्मन को मात देने के लिए

यदि कोई शत्रु बहुत शक्तिशाली हो तो ऐसी स्थिति में यदि मां बगलामुखी के इस मंत्र को विधिपूर्वक पढ़कर नीचे लिखे अनुसार जप किया जाए तो शत्रु से तुरंत रक्षा मिलती है।

ॐ ह्लीं बगलामुखी अमुक (शत्रु का नाम लें) दुष्टानाम वाचं मुखम पदम स्तम्भय स्तम्भय।
जिव्हां कीलय कीलय बुद्धिम विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ।।

एक निश्चित शब्द के स्थान पर शत्रु का नाम लेकर दिन में कम से कम 1100 बार इस मंत्र का जप करें, ऐसा करने से मां बगलामुखी साधक की रक्षा करेंगी और साधक का शत्रु या तो किसी संकट में फंस जाएगा या फिर कोई बड़ी गलती कर देगा जिससे कि वह अपने आप फंस जाएगा।

सम्पुट मंत्र की शक्ति को दोगुना करने के लिए किया जाता है, किसी भी मंत्र की शक्ति को संपुट से बढ़ाने के लिए साधक को पहले बिना संपुट के एक निश्चित संख्या में जप करना चाहिए, उसके बाद ही संपुट लगाया जा सकता है। मंत्र के आरंभ और अंत में बीज लगाने से मंत्र पूर्ण हो जाता है।

बगलामुखी माता की कहानी

कहा जाता हैं कि सतयुग में, एक भयंकर तूफान ने सृष्टि को नष्ट करना शुरू कर दिया। भगवान विष्णु परेशान थे और उन्होंने हल्दी की झील हरिद्रा सरोवर के तट पर देवी पार्वती को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की। विष्णु से प्रसन्न होकर, देवी प्रकट हुईं और झील से बगलामुखी को प्रकट किया। बगलामुखी ने तूफान को शांत किया और ब्रह्मांड में व्यवस्था बहाल की। ​​

एक अन्य कहानी के अनुसार मदन नाम के एक राक्षस ने वाक्-सिद्धि प्राप्त की, जिससे उसने जो कुछ भी कहा वह सच हो गया। उसने इसका दुरुपयोग मनुष्यों को परेशान करने और लोगों की हत्या करने के लिए किया। देवताओं ने बगलामुखी से प्रार्थना की। देवी ने राक्षस की जीभ पकड़ ली और उसकी शक्ति को स्थिर कर दिया। मदन ने देवी से अनुरोध किया कि उनकी पूजा उनके साथ की जाए; उसका वध करने से पहले देवी ने उसे यह वरदान दिया था।

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